सहस्त्रधारा आश्रम में श्रावण मास अनुष्ठान का समापन
रुद्राभिषेक और महाप्रसादी में उमड़े श्रद्धालु
- संत मोहनदास की तपोभूमि में संतों के समागम
- कन्या भोज के साथ संपन्न हुआ सावन मास का विशेष पूजन
मंडला महावीर न्यूज 29. पावन नर्मदा तट पर स्थित सहस्त्रधारा के संत मोहनदास आश्रम में श्रावण मास के उपलक्ष्य में चल रहे एक महीने के विशेष अनुष्ठान का विधिवत समापन हो गया। रुद्राभिषेक, पूर्ण आहुति, संतों के समागम, कन्या भोज और विशाल महाप्रसादी के साथ इस धार्मिक आयोजन की पूर्णाहुति हुई। समापन अवसर पर रामचरितमानस की चौपाई बिनु सत्संग ना हरि कथा, तेहि बिनु मोह ना भाग। मोहि गए बिनु राम पद, होई न दृढ अनुराग। के गान ने पूरे आश्रम परिसर के माहौल को भक्तिमय कर दिया।
नर्मदा से निकले थे 11 ज्योतिर्लिंग, 20 वर्षों से जारी है परंपरा
सहस्त्रधारा का यह आश्रम पूज्य संत मोहनदास महाराज की तपोभूमि और रामदास महाराज जी की कर्मस्थली रहा है। इसका इतिहास अत्यंत रोचक और आस्था से जुड़ा है। बताया जाता है कि पूज्य मोहनदास जी महाराज ने मां नर्मदा का आवाहन कर 11 वर्षों में एक-एक कर 11 ज्योतिर्लिंग निकाले थे। उनका संकल्प 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना का था, लेकिन संकल्प पूर्ण होने से पहले ही वे देवलोक गमन कर गए।
संत निर्भयानंद महाराज ने पूर्ण किया था संकल्प
पूज्य मोहनदास जी के देवलोक गमन के बाद चातुर्मास में निकले संत निर्भयानंद महाराज जी ने मां नर्मदा से 12वां ज्योतिर्लिंग निकालकर आश्रम परिसर में पीपल के वृक्ष के नीचे द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। पिछले 20 वर्षों से यहां यह धार्मिक परंपरा और पूजन अनवरत संपादित हो रहा है। आयोजकों ने बताया कि पूरे श्रावण मास के दौरान आश्रम में प्रतिदिन भगवान शिव का अभिषेक, पूजन-अर्चन और भंडारे का आयोजन किया गया। अनुष्ठान के अंतिम दिन धर्मप्रेमियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर महाप्रसादी ग्रहण की और संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म लाभ लिया।










