संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी हलषष्ठी व्रत
- बाजार में 200 रुपए किलो बिका पसहर चावल
- महुआ की दातुन और भैंस के दूध से महिलाएं करेंगी व्रत का पारणा
मंडला महावीर न्यूज 29. बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना का प्रमुख पर्व हलषष्ठी बुधवार को पूरी श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पुत्रवती माताएं अपने बच्चों के सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। इस व्रत के लिए 15 दिन से बाजार में रौनक नजर आ रही है। बताया गया कि त्योहार को लेकर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों के बाजारों में खासी रौनक देखी गई। रेडक्रास तिराहा से लेकर बड़ चौराहा तक फुटपाथ और हाथ ठेलों पर पूजन सामग्री की सौ से अधिक दुकानें सजी है। बाजार में बिना हल चले उपजने वाला पसाई चावल 200 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, वहीं पूजा में इस्तेमाल होने वाली बांस की टोकनी 50 से 200 रुपए तक में बिक रही है। व्यापारियों ने महिलाओं की सुविधा के लिए पूजन सामग्री और छह प्रकार की भाजी का पूरा सेट बनाकर बेच रहे है। जिससे लोगों को भटकना ना पड़े।
भगवान बलराम के जन्म से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। बलराम जी का प्रमुख शस्त्र हल और मूसल है, जिसके कारण उन्हें कहा जाता है। इसी वजह से इस पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा और इस दिन हल तथा कृषि उपकरणों के पूजन का विशेष महत्व है।
गाय का दूध और जोता हुआ अनाज रहता है वर्जित
इस व्रत के नियम बेहद कठिन और प्रकृति से जुड़े हुए हैं। वरदान आश्रम के नीलू महाराज ने बताया कि इस व्रत में गाय के दूध, दही या घी का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। पारणा और पूजन में केवल भैंस के दूध और दही का ही उपयोग किया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं महुआ की दातुन करती हैं। स्थानीय निवासी कमलेश बाई और पुष्पा जंघेला ने बताया कि हलषष्ठी के दिन हल को छूना तो दूर, महिलाएं हल चली हुई जमीन पर पैर तक नहीं रखतीं। हल से जोतकर उगाए गए किसी भी अनाज या फल का सेवन इस व्रत में नहीं किया जाता है। सूर्यास्त के बाद, महिलाएं बिना जोते उगे पसहर चावल, छह प्रकार की भाजी और भैंस के दूध-दही का सेवन कर अपने व्रत का पारणा करती हैं।









