प्राकृतिक खेती योजना में लापरवाही
मवई की 12 कृषि सखियों को 1 साल से नहीं मिला मानदेय
- 125 किसानों की प्रोत्साहन राशि भी अटकी
- आत्मा संस्था पर भेदभाव का आरोप
- बकाया भुगतान न होने पर कृषि सखियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
मंडला महावीर न्यूज 29. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्राकृतिक खेती योजना के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने वाली कृषि सखियों के साथ विभागीय भेदभाव और लापरवाही बरती जा रही है। जिले के मवई विकासखंड की 12 कृषि सखियों को पिछले एक साल से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा 125 किसानों की प्रोत्साहन राशि भी अटकी हुई है। अपनी इन्हीं समस्याओं को लेकर सोमवार को किसान गर्जना संगठन से जुड़ी कृषि सखियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचीं कृषि सखी आकांक्षा बघेल, हेमवती माधवे, देवकुमारी यादव, अंजूलता रजक ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 से काम शुरू किया था, लेकिन उन्हें केवल 3 महीने का मानदेय ही दिया गया। अक्टूबर 2025 से आज तक का मानदेय, मोबाइल उपकरण की राशि और जैविक खाद उपकरण की राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
कृषि सखी अमरवती परते ने बताया कि सितंबर 2025 में सभी 12 सखियों को कृषि विज्ञान केंद्र तिंदनी में 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद उन्होंने चिन्हित गांवों के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए तैयार किया। घर-घर जाकर जैविक खाद बनाने, उन्नत बीज और मृदा परीक्षण का प्रशिक्षण दिया। चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक किया और 30 किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी बांटे।
किए गए थे ये वादे, पर निकले खोखले
आत्मा संस्था द्वारा कृषि सखियों को पांच हजार रुपये मासिक मानदेय, एंड्रॉइड मोबाइल के लिए चार हजार रुपये और जैविक खाद उपकरण के लिए चार हजार रुपये देने का वादा किया गया था। लेकिन जब भुगतान के लिए डीडीए कार्यालय में संपर्क किया गया, तो बताया गया कि मवई विकासखंड के 125 किसानों के क्लस्टर का अनुमोदन नहीं हुआ है, जिसके कारण आत्मा संस्था ने मवई को योजना से हटा दिया है।
अन्य ब्लॉकों में भुगतान, मवई के साथ सौतेला व्यवहार
कृषि सखियों का आरोप है कि मंडला जिले के अन्य विकासखंडों और दूसरे जिलों में कृषि सखियों को मानदेय व सपोर्ट राशि दी जा चुकी है, लेकिन मवई की सखियों को दरकिनार किया जा रहा है। उल्टे अब संस्था द्वारा उन पर काम न करने का दबाव बनाया जा रहा है। आक्रोशित कृषि सखियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनका बकाया मानदेय, मोबाइल राशि और किसानों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे आत्मा संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए विवश होंगी।
किसान गर्जना संगठन ने जताई आपत्ति
पीडी खैरवार एवं चंद्रगुप्त नामदेव, किसान गर्जना संगठन मंडला ने बताया कि सरकार एक तरफ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात करती है और दूसरी तरफ जमीन पर काम करने वाली महिलाओं को भुखमरी की कगार पर धकेल रही है। मानदेय और अन्य सपोर्ट राशि रोकना सरासर अन्याय है। हम जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि शीघ्र जांच कराकर वाजिब भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।









