3 साल से नए स्कूल के इंतजार में बच्चे

जर्जर भवन के कारण जान जोखिम में डालने को मजबूर झूलनटोला के बच्चे

3 साल से नए स्कूल का इंतजार

  • कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण
  • खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे नौनिहाल
  • जल्द नए भवन न बनने पर आंदोलन की चेतावनी

मंडला महावीर न्यूज 29. शासन के स्कूल चलें हम और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे बड़े दावों की जमीनी हकीकत मंडला जिले में खोखली नजर आ रही है। जिले के विकासखंड मवई के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरीदादर के आश्रित ग्राम झूलनटोला में संचालित प्राथमिक शाला का भवन पिछले कई वर्षों से जर्जर अवस्था में है। भवन की छत और दीवारें पूरी तरह टूट चुकी हैं। शिक्षा विभाग द्वारा पुराने भवन को डिस्मेंटल का आदेश तो जारी कर दिया गया, लेकिन अधिकारी नया भवन बनवाना भूल गए।बताया गया कि नए भवन की स्वीकृति न मिलने के कारण बच्चे मजबूरी में असुरक्षित खुले आसमान के नीचे या किसी के निजी घर में पढऩे को विवश हैं। हाल ही में सैकड़ों ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर के चेंबर में यह गंभीर समस्या रखी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जून 2027 तक नया भवन बनवाने का आश्वासन दिया है।

ग्रामवासियों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि प्रशासन स्तर पर लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अक्टूबर 2024 में स्थानीय सरपंच द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी मवई को जर्जर भवन के संबंध में पत्र लिखा गया। इसके बाद अगस्त 2026 में ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शासन से नए भवन की मांग की गई थी। वहीं मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के शिविर में भी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जिले भर के स्कूलों का यही हाल 

शिक्षा विभाग भले ही कागजों में 100 प्रतिशत नामांकन के दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि मंडला जिले के अधिकांश विकासखंडों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है।

आंदोलन की दी चेतावनी 

बच्चों को असुरक्षित माहौल में पढ़ता देख पालकों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि अगर किसी भी समय छत या दीवार गिर गई तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं। देवरीदादर झूलनटोला के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने जनसुनवाई में कलेक्टर और डीपीसी से मांग की है कि झूलनटोला सहित जिले के ऐसे सभी जर्जर स्कूलों का तत्काल सर्वे कराया जाए। यदि जल्द नए भवन स्वीकृत नहीं किए गए, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

पालक महासंघ ने जताई चिंता 

पालक महासंघ जिला अध्यक्ष पीडी खैरवार ने कहां कि विकासखंड मवई के देवरीदादर झूलन टोला में तीन वर्षों से प्राथमिक शाला के लगभग पांच दर्जन बच्चों की पढ़ाई किसी ग्रामीण के खुले व असुरक्षित आंगन में हो रही है। जिले के सैकड़ों स्कूलों की यही स्थिति है। आवेदन, निवेदन और मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन को जगाने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है, जिससे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। प्रशासन का ध्यान समय रहते नहीं गया तो पालकों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


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