151 लीटर नर्मदा जल से हुआ भगवान भोलेनाथ का महाभिषेक

151 लीटर नर्मदा जल से हुआ भगवान भोलेनाथ का महाभिषेक

मंडला में कांवड़ यात्रा में दिखा आस्था और उत्साह का अनूठा संगम

  • हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा मंडला शहर
  • निकली भव्य कांवड़ यात्रा, उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

मंडला महावीर न्यूज 29. सावन मास के पावन अवसर पर शहर में शिवभक्तों की अगाध आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। मुन्नी बाई धर्मशाला के सामने स्थित शिव मंदिर से एक भव्य कांवड़ यात्रा निकाली गई। इस कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि शिवभक्तों ने 151 लीटर पवित्र नर्मदा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर पूरे नगर का भ्रमण किया और अंत में किला घाट स्थित व्यास नारायण मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया।

जानकारी अनुसार शिव कांवड़ आयोजक समिति द्वारा इस कांवड़ यात्रा का आयोजन पिछले पांच वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इस वर्ष भी यात्रा भव्यता के साथ निकाली गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। यात्रा की शुरुआत मुन्नीबाई धर्मशाला स्थित शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन के साथ हुई। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा ने भगवान भोलेनाथ की पूजा कर कांवडिय़ों को तिलक लगाया और माला पहनाकर यात्रा को रवाना किया।

धर्मप्रेमियों ने की सहभागिता 

बताया गया कि आयोजित कांवड़ यात्रा बलराम चौक, पड़ाव, चिलमन चौक, बस स्टैंड, ज्ञानदीप स्कूल, नगर पालिका, बड़ा चौराहा अंबेडकर चौक, उदय चौक, सराफा और बुधवारी होते हुए किला घाट स्थित व्यास नारायण मंदिर पहुंची। जहां जलाभिषेक के बाद मंदिर प्रांगण में रात्रिकालीन भजन संध्या और पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

कांवड़ यात्रा का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व 

सामाजिक कार्यकर्ता किशोर रजक ने यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति समर्पण और श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रतीक है। बताया गया कि समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को पीकर जब शिवजी को कष्ट हुआ, तो रावण ने कांवड़ में गंगाजल लाकर उन्हें अर्पित किया था। वहीं श्रवण कुमार द्वारा अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा कराने और भगवान परशुराम द्वारा पुरा महादेव में जलाभिषेक करने की कथाएं भी कांवड़ यात्रा की शुरुआत से जुड़ी मानी जाती हैं। बताया गया कि कांवडि़ए दिन-रात शिव का स्मरण करते हुए उपवास रखते हैं और भगवा वस्त्र धारण कर त्याग व तपस्या का संदेश देते हैं।

युवाओं में दिखा खासा उत्साह 

शिव कांवड़ आयोजक समिति के गुड्डू ठाकुर ने बताया कि कांवडि़ए समाज में भक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। आज के आधुनिक समय में बड़ी संख्या में युवा इस यात्रा से जुड़ रहे हैं, जो हमारी धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने का कार्य कर रहा है। कांवड़ यात्रा व्यक्ति को अध्यात्म से जोडऩे के साथ-साथ समाज में एकजुटता की भावना का भी निर्माण करती है।

कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति 

आयोजन में मुख्य रूप से सामाजिक कार्यकर्ता शशि पटेल, रंजीत कछवाहा, अखिलेश सोनी, नीरज अग्रवाल, मुकेश सोनी, सुधीर कांसकार और सुनील मिश्रा उपस्थित रहे। इसके साथ ही शिव कांवड़ आयोजक समिति से गुड्डू ठाकुर, माया रजक, पूर्णिमा रजक, रानू रजक, नेता नंदा, मुन्ना कोष्टा, राजू नंदा, पप्पू साहू, विश्वकर्मा जी, केसर नंदा, सवीता तिवारी, अमित रजक, तुषार चौरसिया और नरेंद्र लहोरिया सहित अनेक शिवभक्तों ने व्यवस्था संभालने और यात्रा को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।


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