व्यापारी पर जानलेवा हमले का फरार आरोपी सैंडी बरमैया भोपाल से गिरफ्तार
सह-आरोपी कपिल साहू भी चढ़ा पुलिस के हत्थे
अवैध रेत कारोबार और राजनीतिक संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल
डंपरों की फौज और वाइट हाउस स्टॉक की जांच की मांग तेज
मंडला महावीर न्यूज 29. लंबे समय से मंडला जिले में रेत के कारोबार को लेकर विवाद, राजनीतिक हस्तक्षेप और वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में बम्हनी क्षेत्र के चर्चित और कई मामलों में विवादित रहे सैंडी बरमैया को आखिरकार बरेला पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ कथित सह-अभियुक्त कपिल साहू को भी पुलिस ने दबोचा है। इस गिरफ्तारी से पुलिस ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन इस पूरे मामले ने फरारी, राजनीतिक संरक्षण और अवैध रेत कारोबार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरेला पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार व्यापारी शंकर गुरनानी पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में सैंडी बरमैया लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार हमले में व्यापारी शंकर गुरनानी के सिर पर गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें कई टांके लगाने पड़े थे। घटना के बाद बरेला पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। बरेला थाना प्रभारी संगीता सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, उत्तराखंड, रायपुर और मंडला में लगातार दबिश दी। अंतत: मुखबिर तंत्र और तकनीकी जानकारी के आधार पर भोपाल क्षेत्र में रात के समय दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जबलपुर लाया गया। इन पर कथित तौर पर हजारों रुपये का इनाम भी घोषित था।
फरारी और राजनीतिक संरक्षण पर उठ रहे सवाल
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी इतने लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर कैसे रहा, यह एक बड़ा सवाल है। फरारी के दौरान उसे आर्थिक और अन्य प्रकार की मदद किसने उपलब्ध कराई, इसकी जांच होना बाकी है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
शिकायतकर्ता का दावा है कि फरारी के दौरान सैंडी को मंडला जिले के एक थाने से कथित तौर पर मुचलका भी दिया गया। मामले में अपेक्षित कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता हाईकोर्ट तक पहुंचे, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब-तलब की स्थिति बनी। मंडला के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उसे बचाने के आरोप भी लगते रहे हैं।
रेत का अवैध साम्राज्य
सैंडी बरमैया की गिरफ्तारी के बाद उसके कथित अवैध रेत कारोबार की परतें भी खुलने लगी हैं। बम्हनी क्षेत्र में रेत के कारोबार में उसका काफी दबदबा माना जाता है। आरोप है कि उसके पास डंपरों और छोटे-बड़े वाहनों की एक लंबी फौज है, जिसके माध्यम से दिन-रात रेत का परिवहन अलग-अलग शहरों और जिलों में किया जाता है। बम्हनी क्षेत्र के पास वाइट हाउस के नाम से पहचाने जाने वाले स्थान पर रेत का एक बड़ा अवैध स्टॉक होने की बात भी सामने आई है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण किसकी अनुमति से हुआ?
संयुक्त जांच की आवश्यकता
इस बड़े पैमाने पर चल रहे कथित कारोबार की वास्तविकता का पता लगाने के लिए खनिज, परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त जांच की आवश्यकता है। वाहनों के स्वामित्व, परमिट, ई-रवन्ना, रॉयल्टी भुगतान और जीपीएस रिकॉर्ड की सघन जांच होनी चाहिए। यदि बिना दस्तावेजों के रेत का इतना बड़ा कारोबार चल रहा था, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ आरोपी को कोर्ट में पेश करने की नहीं, बल्कि फरारी के दौरान उसके नेटवर्क, मददगारों और बेनामी संपत्तियों की पड़ताल करने की भी है।










