जर्जर स्कूल भवन, रंगमंच पर लग रहीं कक्षाएं
जान जोखिम में डालकर पढऩे को मजबूर नौनिहाल
- बैगा बाहुल्य क्षेत्र में शिक्षा बदहाल
- एक शिक्षक के भरोसे 5 कक्षाएं
- ग्रामीणों ने उठाई दोनों स्कूलों को मर्ज करने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. नारायणगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत मल्ठार अंतर्गत खमेर कॉलोनी टोला प्राथमिक शाला के बच्चों का भविष्य इन दिनों एक खुले रंगमंच पर गढ़ा जा रहा है। स्कूल का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि हादसों के डर से कक्षा 1 से लेकर 5 तक की पढ़ाई स्कूल के बजाय रंगमंच पर संचालित करनी पड़ रही है। पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह इलाका बैगा बाहुल्य क्षेत्र है, लेकिन यहां शिक्षा व्यवस्था अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। विद्यालय में लगभग 25 छात्र-छात्राएं दर्ज हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए पूरे स्कूल में केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है। विद्यालय भवन बहुत पुराना हो चुका है। छत टूटकर गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। बरसात के दिनों में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है, जिससे बच्चों को भवन के अंदर बैठाना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।
पड़ोसी स्कूल का भी बुरा हाल, शिक्षकों की हो रही अदला-बदली
पास ही स्थित मल्ठार खमेर टोला प्राथमिक शाला की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। वहां पूरे स्कूल में केवल चार बच्चे दर्ज हैं और वहां भी सिर्फ एक ही शिक्षक है। उस भवन की हालत भी अत्यंत खराब बताई जा रही है। बताया गया है कि कॉलोनी टोला प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक को अस्थायी रूप से खमेर टोला में पढ़ाने के लिए भेजा जा रहा है। इस अव्यवस्था के कारण दोनों ही विद्यालयों का शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने सुझाया विकल्प, दोनों स्कूलों का हो एकीकरण
बच्चों की पढ़ाई खराब होते देख ग्रामीणों ने प्रशासन को एक व्यावहारिक सुझाव दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों विद्यालय एक-दूसरे से महज एक किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। दोनों जगह बच्चों की संख्या काफी कम है। इसलिए दोनों स्कूलों को मर्ज कर एक ही स्थान पर संचालित किया जाए, जिससे बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
अधिकारियों से जल्द कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी से मामले में संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि अधिकारी शीघ्र ही गांव का निरीक्षण करें, नए भवन के निर्माण की स्वीकृति दें और शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था करें। ग्रामीणों ने कहां कि यदि समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो यहां कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है और बच्चों का भविष्य भी अंधकार में डूब जाएगा।










