बालाघाट में बाघ के हमले से सनसनी
मवेशी चराने गए 50 वर्षीय किसान की मौत, गाय-बछड़े का भी मिला शव
- खैरलांजी के पांडरवानी जंगल में खौफ
- मवेशियों को बचाने में गई किसान की जान
- वन विभाग ने दी 50 हजार की तत्काल सहायता
बालाघाट/खैरलांजी/मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के खैरलांजी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मिरगपुर के ग्राम पांडरवानी (सतीटोला) में बाघ के हमले की आशंका से दहशत का माहौल है। गांव से लगे जंगल में मवेशी चराने गए करीब 50 वर्षीय किसान देवकराम वाघमारे (पिता श्यामलाल वाघमारे) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटनास्थल के पास ही एक गाय और उसका बछड़ा भी मृत अवस्था में पाए गए हैं।
रविवार से लापता थे किसान
जानकारी के अनुसार, ग्राम पांडरवानी निवासी देवकराम वाघमारे 9 अगस्त (रविवार) की दोपहर करीब 12 बजे अपनी गाय और बछड़े को चराने के लिए जंगल की ओर गए थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। रात भर खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।
श्मशान घाट के पास मिले शव
10 अगस्त की सुबह करीब 7 बजे परिजन और ग्रामीण जब श्मशान घाट से लगे घने जंगल में पहुंचे, तो वहां का नजारा खौफनाक था। जंगल में गाय और बछड़े का शव पड़ा था, और कुछ ही दूरी पर देवकराम खून से लथपथ मृत अवस्था में मिले। घटनास्थल के आसपास वन्यप्राणी के पंजों के निशान मिलने से ग्रामीणों ने बाघ के हमले की आशंका जताई है।
मवेशियों को बचाने के प्रयास में गई जान
ग्रामीणों का अनुमान है कि बाघ ने पहले गाय और बछड़े को अपना शिकार बनाया होगा। मवेशियों को बचाने के लिए जब देवकराम आगे आए होंगे, तो बाघ ने उन पर भी जानलेवा हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मिरगपुर सरपंच दीपक देशमुख ने वन विभाग और पुलिस को अलर्ट किया।
प्रशासनिक कार्रवाई और आर्थिक सहायता
सूचना मिलते ही कटंगी एसडीओ यशपाल मेहरा, खैरलांजी वन परिक्षेत्र अधिकारी डी.सी. वासनिक और तिरोड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
- मुआवजा: वन विभाग ने मृतक के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। नियमानुसार आगे का मुआवजा भी दिया जाएगा।
- पोस्टमार्टम: तिरोड़ी पुलिस ने पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए कटंगी स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है।
- गश्त: वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है।
गांव में आक्रोश और दहशत
इस घटना के बाद से पांडरवानी और आसपास के गांवों में बाघ की मौजूदगी को लेकर भारी दहशत है। ग्रामीणों और समाजसेवियों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और विशेष सावधानी बरतें। वास्तविक स्थिति की पुष्टि वन विभाग और पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।











