किसानों से धोखाधड़ी का भंडाफोड़, कृषि विभाग की कार्रवाई
मंडला में किसानों को चूना लगाने वाली दो दुकानें सील
- एफआईआर न होने से कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
- अमानक बीज और कीटनाशक बेचने वाले मां रेवा कृषि केंद्र और किसान बीज भंडार सील
मंडला महावीर न्यूज 29. खरीफ फसल की तैयारियों के बीच किसानों को महंगे और अमानक कृषि उत्पाद बेचकर चूना लगाने वाले दुकानदारों पर कृषि विभाग के जांच दल ने शिकंजा कसा है। 4 अगस्त को किए गए औचक निरीक्षण के बाद नगर मुख्यालय की दो बड़ी दुकानों मां रेवा कृषि केन्द्र सब्जी मंडी और किसान बीज भंडार जवाहर गंज को सील कर दिया गया है। इस कार्रवाई से कृषि बीज भंडार संचालकों में हड़कंप मच गया है, लेकिन एफआईआर दर्ज न होने और गोदामों की जांच न होने से कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया गया कि जांच दल को निरीक्षण के दौरान इन दुकानों में कई भारी खामियां मिलीं, जिनके आधार पर इन्हें सील किया गया है। बताया गया कि किसानों को महंगे दामों पर घटिया दर्जे के बीज, कीटनाशक और खरपतवार नाशक बेचे जा रहे थे। स्टॉक और विक्रय अभिलेखों का कोई उचित संधारण नहीं मिला। कई कंपनियों के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट दुकानों के पास उपलब्ध नहीं थे। आधुनिक पैकिंग की आड़ में नकली और अमानक कृषि सामग्री धड़ल्ले से बेची जा रही थी।
दुकान सील, फिर भी घर और गोदामों से चल रहा खेल
सूत्रों के अनुसार कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित रही। मां रेवा कृषि केन्द्र के गोदाम में भारी मात्रा में कृषि सामग्री का भंडार है, जिसके बिल वाउचर में कमियां हैं। वहीं, किसान बीज भंडार के संचालक ने अपने घर में भी सामग्री डंप कर रखी है। दुकान सील होने के बावजूद इन संचालकों के कर्मचारी दिनभर दुकानों के सामने डटे रहते हैं और आने वाले किसानों तथा छोटे व्यापारियों को गुपचुप तरीके से संचालक के घर या गोदाम ले जाकर माल बेच रहे हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यहां से थोक सप्लाई भी की जा रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
कृषि विभाग की भूमिका पर उठते सवाल
किसानों का आरोप है कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी पकड़े जाने के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारियों ने अब तक संचालकों पर एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। गोदामों की जांच न करना जांच दल की मंशा पर सवाल खड़े करता है। पिछले वर्ष जिन दुकानों और गोदामों को सील किया गया था, उन्हें फिर से अनुमति दे दी गई है। पिछले साल नैनपुर क्षेत्र में घटिया धान बीज बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया।
खरीफ सीजन का लक्ष्य और किसानों की चिंता
वर्ष 2026-27 में जिले में लगभग 2.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराए जाएं। भोले-भाले और अशिक्षित किसान दुकानदारों के झांसे में आकर घटिया बीज खरीद रहे हैं, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों डूबने का खतरा है। कृषि विभाग हालांकि सघन औचक निरीक्षण और स्टॉक तथा बिल-बुक की जांच का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में ठोस कार्रवाई के अभाव में किसानों को राहत के बजाय केवल परेशानी और ठगी का सामना करना पड़ रहा है। मांग की जा रही है कि दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इनका कहना है
अनियमिमताओं की शिकायत पर जांच की गई थी जहां पर रिकार्डो के संधारण सहित अन्य लापरवाही सामने आई है दोनो दुकानों को सील कर दिया गया है। गोदामों की जांच के लिए एसडीओ को निर्देश दे रहा हूं।
अश्वनी झारिया, उपसंचालक, कृषि विभाग मंडला









