आदिवासी अंचल में रेल क्रांति की सुगबुगाहट
नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर के सर्वे के लिए रेल मंत्री को पत्र लिखेंगे पुष्पराजगढ़ विधायक
- पेंड्रा-अमरकंटक-मंडला रेल परियोजना को मिला नया राजनीतिक बल
- दशकों पुरानी जन-आकांक्षा को पूरा करने की दिशा में बढ़ा कदम
- पेंड्रा-अमरकंटक-मंडला रेल परियोजना की राह हुई आसान
- विधायक ने दिया रेल मंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी अंचल की बहुप्रतीक्षित पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–घंसौर–लखनादौन–गोटेगांव (श्रीधाम) रेल परियोजना को अब नया राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की पुष्पराजगढ़ विधायक श्री फुन्देलाल सिंह मार्को से हुई विस्तृत चर्चा के बाद इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विधायक ने इस ‘नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर’ के फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) की मांग को लेकर रेल मंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन दिया है।
चर्चा के मुख्य बिंदु और विधायक का आश्वासन
3 अगस्त 2026 को एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने विधायक श्री मार्को से दूरभाष पर संपर्क कर इस रेल कॉरिडोर के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान प्रगति से अवगत कराया।

- सोलंकी ने विधायक से अनुरोध किया कि वे रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर के FLS की शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की मांग करें।
- विधायक मार्को ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए सभी आवश्यक दस्तावेज मांगे, जिन्हें वार्ता के तुरंत बाद उन्हें उपलब्ध करा दिया गया।
- विधायक ने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचल के लोगों के लिए यह रेल लाइन अत्यंत आवश्यक है और वे इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर जल्द ही रेल मंत्री को पत्र लिखेंगे।

दशकों पुरानी है जन-आकांक्षा
यह रेल परियोजना आदिवासी क्षेत्रों के लिए दशकों पुरानी मांग रही है। इसका ऐतिहासिक सफर इस प्रकार है:
- वर्ष 1979–80: मंडला के तत्कालीन सांसद स्वर्गीय श्यामलाल धुर्वे ने लोकसभा में सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था।
- वर्ष 2011–12: मंडला के पूर्व सांसद स्वर्गीय बसोरी सिंह मसराम ने इस मांग को संसद में प्रमुखता से रखा।
- 1 अप्रैल 2026: हाल ही में राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलो देवी नेताम ने भी सदन में इस रेल कॉरिडोर का विषय उठाकर इस मांग को फिर से जीवित किया है।
रेलवे प्रशासन का सकारात्मक रुख
चर्चा के दौरान विधायक को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर द्वारा 9 जुलाई 2026 को जारी पत्र की जानकारी भी दी गई।
- इस पत्र में रेलवे प्रशासन ने प्रस्ताव को जन-उपयोगिता और आर्थिक-सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना है।
- इसे परिचालन विभाग के साथ चर्चा कर आगे की कार्यवाही के लिए अग्रसारित किया गया है।
- बिलासपुर मुख्यालय और नागपुर मंडल, दोनों का प्रशासनिक रुख इस परियोजना के प्रति बेहद सकारात्मक है।
आगे की राह
क्षेत्र के जानकारों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधि एकजुट होकर इस परियोजना का संयुक्त रूप से समर्थन करें, तो नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर के सर्वे (FLS) की मंजूरी जल्द मिल सकती है। यह कदम आदिवासी अंचल के विकास में एक बड़ी रेल क्रांति साबित होगा।












