घंटों तड़पते रहे मरीज, अस्पताल से नदारद रहे डॉक्टर

बम्हनी बंजर स्वास्थ्य केंद्र की लचर व्यवस्था

  • घंटों तड़पते रहे मरीज, अस्पताल से नदारद रहे डॉक्टर
  • अस्पताल या यातना घर, इलाज की आस में घंटों बैठे रहे बच्चे और बुजुर्ग

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदत्तर हो गई है। जिले के बम्हनी बंजर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं ने एक बार फिर मरीजों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इलाज कराने पहुंचे मरीजों को घंटों डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा, लेकिन पूरे अस्पताल से डॉक्टर नदारद रहे। मरीजों को हो रही इस भारी परेशानी और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते अस्पताल परिसर में लोगों का भारी आक्रोश देखने को मिला।
जानकारी अनुसार मरीज सुबह 11 बजे से ओपीडी की पर्ची कटवाकर डॉक्टर के आने की राह देख रहे थे। दोपहर के 3 बज जाने के बाद भी कोई चिकित्सक उन्हें देखने नहीं पहुंचा। अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मरीजों को केवल यह कहकर अश्वासन दिया गया कि डॉक्टर पोस्टमार्टम करने गए हुए हैं। इसके बाद दोपहर 2 बजे कर्मचारियों ने लंच का समय होने का हवाला देते हुए मरीजों को सीधे शाम 5 बजे आने का फरमान सुना दिया। इससे मीलों दूर से आए मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

दर्द से कराहते रहे थे बच्चे और बुजुर्ग 

इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा खामियाजा छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भुगतना पड़ा। अस्पताल में इलाज कराने आए राजेश कुमार नंदा ने बताया कि वह अपनी छोटी बच्ची को लेकर आया था। डॉक्टर के इंतजार में घंटो बैठे रहे। लेकिन कोई चिकित्सक नहीं मिले। उन्होंने बताया कि बच्ची को तेज सर्दी-खांसी थी और उसकी पसली भी चल रही है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं था। वहीं एक बुजुर्ग महिला अपने सीने और सिर में तेज दर्द के बावजूद घंटों इंतजार करने को मजबूर थीं। ग्राम मुगदरा की रहने वाली एक युवती ने बताया कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में 2 से 3 डॉक्टरों की ड्यूटी है, फिर भी कोई मौजूद नहीं था। एक अन्य मरीज शुगर टेस्ट की रिपोर्ट के लिए 3 घंटे से पर्ची हाथ में लिए भटकता नजर आया।

मदद के बजाय दी धमकी 

अस्पताल में इलाज न मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों को देखकर अस्पताल के किसी कर्मचारी ने बम्हनी पुलिस को सूचना दे दी। जिसके बाद पुलिस भी बम्हनी सीएचसी पहुंची। यहां मौजूद मरीजों को मदद के बजाय पुलिस की फटकार सुननी पड़ी। टीआई ने मरीज से कहां कि डॉक्टर को बुलवाते है, लेकिन मरीजों का कहना है कि पुलिसकर्मियों और टीआई ने उनकी समस्या सुलझाने या डॉक्टरों को बुलाने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया गया।

स्वास्थ्य विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग 

परेशान मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े अस्पताल में अगर अचानक कोई गंभीर मरीज आ जाए, तो उसकी जान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। मरीजों ने जिले के उच्चाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी की इस बेलगाम व्यवस्था पर तुरंत लगाम लगाई जाए और समय पर डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।


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