चीतल के शिकारियों को एक-एक साल की सजा

चीतल का शिकार कर मांस खाने वाले तीन शिकारियों को एक-एक साल की सजा

  • क्लच वायर का फंदा बनाकर किया था चीतल का शिकार
  • न्यायालय ने तीन दोषियों को भेजा जेल

मंडला महावीर न्यूज 29. न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (भुआ बिछिया) के न्यायालय ने वन्यजीव अपराध के एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए चीतल का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार देते हुए यह फैसला दिया है।

मुखबिर की सूचना पर हुआ था भंडाफोड़

जानकारी अनुसार 9 नवंबर 2017 को वन विभाग को मुखबिर से गुप्त सूचना मिली थी कि वन परिक्षेत्र खटिया बफर के अंतर्गत आने वाले ग्राम बटवार में एक चीतल का शिकार कर उसका मांस पकाकर खाया गया है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन अधिकारियों की टीम ने संदेही लामूसिंह (पिता फगनू सिंह, निवासी बटवार) को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

क्लच वायर से फंदा बनाकर किया था शिकार

पूछताछ के दौरान लामूसिंह ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर क्लच वायर का फंदा बनाया था, जिसमें फंसाकर चीतल का शिकार किया गया और बाद में उसका मांस पकाकर खाया गया।

कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने शिकार में शामिल अन्य आरोपियों को भी धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मनोज उर्फ सुकल (पिता लामूसिंह) और संतोष (पिता साधूसिंह) शामिल थे। वन अमले ने आरोपियों के कब्जे से चीतल का चमड़ा, सींग, पूंछ का टुकड़ा, बाल, कुल्हाड़ी और शिकार में प्रयुक्त फंदा बरामद किया।

वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई

वन विभाग द्वारा इन सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 39(3)(ए), 48(ए), 51 और 52 के तहत न्यायालय में परिवाद पत्र पेश किया गया था।

विचारण के दौरान सामने आए साक्ष्यों तथा अभियोजन एवं बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद, न्यायिक दंडाधिकारी ने लामू, मनोज उर्फ सुकल और संतोष को चीतल के शिकार का पूर्ण रूप से दोषी माना और तीनों को 1-1 साल के कारावास से दंडित किया।

एक आरोपी फरार, फैसला सुरक्षित

इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी सुकदेव उर्फ गिरानी (पिता कमल सिंह) फिलहाल फरार चल रहा है। आरोपी के फरार होने के कारण न्यायालय ने सुकदेव के संबंध में अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इस पूरे प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी कामेंद्र सिंह परस्ते ने सशक्त पैरवी की।


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