विंध्य के लिए ‘भगीरथ’ बने मुख्यमंत्री डॉ. यादव, एमपी को मिले 20 हजार 193 करोड़ के प्रस्ताव

विंध्य के लिए ‘भगीरथ’ बने मुख्यमंत्री डॉ. यादव

देश की सबसे लंबी जल-सुरंग स्लीमनाबाद टनल का शुक्रवार को करेंगे निरीक्षण

  • 17 वर्षों की कठिन भू-गर्भीय चुनौती के बाद अंतिम चरण में पहुंची
  • 11.952 किमी लंबी सुरंग नर्मदा का जल गुरुत्वाकर्षण से पहुंचेगा विंध्य के खेतों तक
  • 6 जिलों के 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा स्थायी सिंचाई लाभ

भोपाल /मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब पूर्णता के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कटनी जिले में देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा के जल को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इसके पूरा होने के साथ ही जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।मध्यप्रदेश के विकास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने और विंध्य की सदियों प्यासी धरती को सींचने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं भगीरथ बनकर मैदान में उतर आए हैं। कटनी जिले में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित की जा रही देश की सबसे लंबी और सबसे जटिल जल-सुरंग , यानी स्लीमनाबाद टनल, अब अपनी पूर्णता की ओर है। इसका जमीनी जायजा लेने मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को स्लीमनाबाद पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह संवेदनशील और उच्च-स्तरीय दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण भर नहीं है, बल्कि यह विंध्य और महाकौशल के लाखों किसानों के आंगन में समृद्धि, खुशहाली और लहलहाती फसलों के नए युग का शंखनाद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इसी संकल्प और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर सत्रह वर्षों की भू-गर्भीय जंग को जीतकर आज नर्मदा मैया का विंध्य की धरा पर उतरने का स्वप्न साकार होने जा रहा है।

भागीरथी संकल्प का उदय

यह जल-सुरंग केवल कंक्रीट और पत्थरों को जोड़कर बनाई गई कोई यांत्रिक संरचना नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने एक पौराणिक विरह को मिटाने वाला पवित्र महासेतु है। लोक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक के मैकल पर्वतों से निकलने वाली माँ नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से दूर चले गए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी प्राचीन विरह को मिटाने और विंध्य के सूखे खेतों को पानी देने के लिए इस टनल परियोजना को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया। आज उन्हीं के भगीरथ प्रयासों से विंध्य पर्वतमाला से अमृत-धारा सीधे सोन नदी के कछार में मिलने के लिए आतुर खड़ी है।

इस महा-परियोजना को इसकी मंजिल तक पहुंचाने का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और अभूतपूर्व प्रशासनिक निर्णयों को जाता है। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही इस परियोजना के महत्व को समझा और लगातार की गई व्यक्तिगत समीक्षाओं, त्वरित ऑन-द-स्पॉट फैसलों और निरंतर दिए गए कम बजट समर्थन ने इस बेहद जटिल कार्य को एक जादुई रफ्तार दे दी। अब इस 11.952 किलोमीटर लंबी महा-सुरंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिसमें अब मात्र अंतिम एक मीटर का ब्रेक-थ्रू सफर शेष रह गया है।

असंभव को कर दिखाया संभव

तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना पूरी दुनिया के इंजीनियरों के लिए एक स्वप्न जैसा था। जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे चल रहे इस महा-अभियान में मार्बल-लाइमस्टोन की चमकती कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने हर कदम पर रास्ता रोका। टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक उफनते पानी के रिसाव और अचानक धंसने वाली मिट्टी जैसी विकट परिस्थितियों में जब पूर्व में काम कर रही अमेरिकी मशीन भी टूटकर पस्त हो गई, तब मुख्यमंत्री के दृढ़ संकल्प के चलते त्वरित निर्णय लेकर अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक को युद्धस्तर पर उतारा गया। यह मध्यप्रदेश सरकार की संवेदनशीलता ही थी कि घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल को बिना किसी क्षति के पूरी सुरक्षा के साथ पूर्ण कर लिया गया।

विश्व स्तरीय निर्माण तकनीक

इस टर्न-की (Turn-key) आधार पर स्वीकृत महा-परियोजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा हैदराबाद की प्रतिष्ठित निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। वर्ष 2008 में जब इस विशाल परियोजना का अनुबंध हुआ था, तब इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये थी। हालांकि, विंध्य के भू-गर्भ की अप्रत्याशित और असाधारण भौगोलिक बाधाओं, अभूतपूर्व जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयासों और वैश्विक तकनीक के समावेश के कारण इस पर अब तक कुल 1610.47 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। इस कुल व्यय में जहां मूल कार्यमद पर 772.33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, वहीं समय के साथ हुए मूल्य समायोजन पर 573.71 करोड़ रुपये, उच्च क्षमता के आधुनिक डीवॉटरिंग सिस्टम पर 123.99 करोड़ रुपये, वर्टिकल शाफ्ट के निर्माण पर 19.36 करोड़ रुपये और चट्टानों के स्थिरीकरण के लिए की गई केमिकल ग्राउटिंग पर 121.08 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।

भौतिक प्रगति के नये कीर्तमान और शत-प्रतिशत पूर्णता:

सरकार की इसी अनवरत वित्तीय और तकनीकी मदद का सुखद परिणाम है कि आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत भौतिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य ऐतिहासिक जल-सुरंग का भौतिक निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं, कट एंड कवर तकनीक से बनाई जा रही 0.913 किलोमीटर नहर का भी 0.725 किलोमीटर हिस्सा पूरा कर लिया गया है और अब केवल नाममात्र का 0.188 किलोमीटर का काम शेष है, जिसे अंतिम लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

विंध्य और महाकौशल के 5 जिलों में समृद्धि

यह विशाल जल-सुरंग देश की पहली ऐसी इंजीनियरिंग मिसाल बनने जा रही है, जहां 10.14 मीटर व्यास की टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा जल बिना किसी बिजली या भारी पंपों के, केवल प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी फ्लो के सहारे बहेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हैक्टेयर भूमि हमेशा के लिए सिंचित हो जाएगी। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 84 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा।

समयबद्ध रोड़मैप

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में टनल के बाद के सभी आठ ग्रुपों का काम इस समय पूरी ताकत से चल रहा है। इस सजग मॉनिटरिंग के चलते मार्च 2026 तक ही 44 हजार 160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता को धरातल पर उतारकर किसानों को लाभान्वित करना शुरू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने इसके बाद का भी पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसके तहत दिसंबर 2026 तक 87 हजार 433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1 लाख 54 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा स्लीमनाबाद की एक टनल का निरीक्षण विंध्य के माथे पर हमेशा के लिए खुशहाली और समृद्धि का तिलक लगाने का एक ऐतिहासिक क्षण साबित होने जा रहा है।


एमपी को मिले 20 हजार 193 करोड़ के प्रस्ताव, 27 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली में हुए ‘भारत टेक्स-2026’ और ‘इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम

  • प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने उद्योगपतियों-निवेशकों को बताईं मध्यप्रदेश की खूबियां
  • जनवरी में होने वाली जीआईएस-2027 के लिए व्यापार जगत को मिला आमंत्रण

भोपाल/नई दिल्ली/मंडला महावीर न्यूज 29.  ‘हमारे मध्यप्रदेश में लेबर की कोई प्रॉब्लम नहीं होती। अगर कोई उद्योगपति यहां उद्योग लगाकर 10-20 साल कहीं और कुछ करना चाहे तो उसके उद्योग को कुछ नहीं होगा। प्रदेश की जनता अपने काम को अच्छे से करना और निभाना जानती है।’ यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव 16 जुलाई को नई दिल्ली की होटल द लीला पैलेस में आयोजित ‘इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर कई उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेश संबंधी एमओयू साझा किए गए। बता दें, राज्य ने नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 तथा “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश” के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों आयोजनों में प्रदेश को 20 हजार 193 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों से लगभग 27 हजार 592 लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। दोनों कार्यक्रमों में सीएम डॉ. यादव ने निवेशकों-उद्योगपतियों और वैश्विक ब्रांड के प्रतिनिधियों से गहन चर्चा की। उन्होंने सभी को जनवरी-2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) में भाग लेने का आमंत्रण दिया।‘इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मैं सभी उद्योगपतियों-निवेशकों का अभिनंदन करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के नक्शे पर अपनी साख और धाक बना रहा है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हम देश के बदलते समय को देख पा रहे हैं। आदि काल से सोने की चिड़िया जैसे अलंकरणों से भारत की पहचान होती रही है। 12 साल का समय बहुत छोटा होता है। इस छोटे से समय में भी वो सारी चीजें भी हो गईं, जिसके लिए कभी-कभी कहा जाता था कि ये तो भारत में हो ही नहीं सकता, भारत के लोग ये कैसे कर देंगे, ये तो यहां असंभव है। मुझे इस बात का संतोष है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में वर्तमान के समय में असंभव भी संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात यह भी है कि वो निर्णय जो राजनेताओं के कदम रोकते थे , उन निर्णयों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने मिथक तोड़े हैं। अब तो लोग यह कहने लगे हैं कि जो सारे जहां में असंभव है, वो भारत में संभव है।

राज्य कल्याण के लिए उठाए कई कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आम तौर पर जब कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठता था, तो वह जिस प्रदेश और शहर का होता था, राजनीति उसके आसपास घूमती थी। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने समान रूप से सभी को अवसर प्रदान किए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया, सभी राज्यों को प्रगति के समान अवसर और प्रमोशन के मौके दिए। हमारी सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें और बाकी राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि मैं अभी से आप सभी को जीआईएस 2027 का निमंत्रण देने आया हूं, यही समय के परिवर्तित होने का प्रमाण है। हमारी सरकार ने व्यवसाय को गंभीरता से लिया है। हमारे अधिकारियों ने प्रजेंटेशन के जरिये सरकार की नीति और नियति बताने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एक वर्ष को छोड़ दिया जाए तो, बाकी के वर्ष में हमने राज्य के कल्याण के लिए कई कदम उठाए।

टेक्सटाइल में अनंत संभावनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे राज्य ने सारे सेक्टर में प्रतिबद्धता सिद्ध की है। कपास और ऑर्गेनिक कपास की खेती के लिए राज्य नंबर-1 है। लेकिन, ब्रिटिश काल की नीतियों और सरकारों की उदासीनता ने वो ताज छीन लिया। हमारे इंडस्ट्रियल पार्क का जिस दिन भूमि-पूजन होता है, उस दिन सारे प्लॉट भी आवंटित हो जाते हैं। जीआईएस 2025 में हमारे पास 32 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए थे। जीआईएस के प्रस्ताव अगर 10 फीसदी भी धरातल पर उतर जाएं तो बहुत बड़ा आंकड़ा माना जाता है। लेकिन, डेढ़ साल में ही 10 लाख करोड़ के प्रस्ताव न केवल धरातल पर उतरे, बल्कि काम भी शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बिजली मध्यप्रदेश से मिल रही है। कहीं और उद्योग लगाओ तो जनरेटर का सेट लगाना पड़ता है, लेकिन अगर प्रदेश में उद्योग लगाओ तो बिजली जाती ही नहीं है। हमारे पास बिजली सरप्लस है। मध्यप्रदेश में कुशल और व्यवहारिक कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता भी है। राज्य में एमएसएमई, लघु-कुटीर उद्योग, माइनिंग, फार्मा, टेक्सटाइल प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनंत संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश देश का दूसरा बड़ा खाद्यान्न उत्पादक राज्य है। देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं का उपार्जन मध्यप्रदेश ने किया है। मध्यप्रदेश फूड इंडस्ट्री के लिए अनुकूलता वाला राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि अगर एक रुपए निवेश करें तो 75 पैसे सब्सिडी के रूप में वापस मिल जाते हैं। हमारी सरकार रोजगार परक उद्योग स्थापित करने पर श्रमिकों के वेतन के लिए निवेशकों को 5 साल तक 5000 रुपए प्रति श्रमिक आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक है। बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश में फूड पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, मल्टी मॉडल पार्क जैसी अनेकों सौगातें मिली हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर लंबा रोड नेटवर्क है। सुदृढ़ रेलवे कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतरराष्ट्रीय कंटेनर, एक्सप्रेसवे और हाइवे हैं। आइए, मध्यप्रदेश के साथ मिलकर आगे बढ़ें।

भारत टेक्स-2026 में क्या हुआ

भारत मंडपम में आयोजित टेक्सटाइल राउंड टेबल में प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, तकनीकी वस्त्र, निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और निवेश प्रोत्साहन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस आयोजन में 1,592 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 15,700 रोजगार सृजित होने की संभावना है। इंटरैक्टिव सेशन के दौरान एमपीआईडीसी ने निर्यात संवर्धन, ई-कॉमर्स, वैश्विक व्यापार, एमएसएमई और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। साथ ही रक्षा, डेटा सेंटर, आईटी, एआई, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण सहित अनेक क्षेत्रों में निवेश अवसर प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा दिल्ली निवेश संवाद में रक्षा, डेटा सेंटर, ट्रांसफॉर्मर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग और खिलौना उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में 18 हजार 601 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 11,892 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों, साझेदारियों और एमओयू के माध्यम से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

दुनियाभर के निवेशक हो रहे आकर्षित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2025 को मध्यप्रदेश के धार को देश के पहले पीएम मित्र पार्क की सौगात दी थी। गारमेंट सेक्टर के इस पार्क के भूमि-पूजन के साथ ही यहां 90 प्रतिशत भू-खंडों का आवंटन भी पूरा कर लिया गया। यह एक रिकॉर्ड है और काम के प्रति राज्य सरकार की दक्षता प्रकट करती है। उन्होंने कहा कि पीएम मित्र पार्क के आसपास भी निवेशक अब उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की मांग कर रहे है। प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूलता, कच्चे धागे के लिए माल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर मध्यप्रदेश निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश की बढ़ती निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन की शक्ति से दुनिया परिचित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर में विशेष पहचान रहा है। राज्य में उद्योगों को आर्थिक सब्सिडी, बिजली आपूर्ति, भूमि आवंटन, स्टांप ड्यूटी में छूट जैसी नीतियों से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में है और अपनी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में मध्यप्रदेश को 33 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। वर्ष 2027 में फिर जीआईएस का आयोजन होगा, उम्मीद है कि इसमें निवेश का रिकॉर्ड टूटेगा।


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