अतिथि शिक्षकों की भर्ती पर गहराया संकट

अतिथि शिक्षकों की भर्ती पर गहराया संकट

90% उपस्थिति की अनिवार्यता से आक्रोश

पोर्टल के झमेले और कड़े नियमों के कारण स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: पी.डी. खैरवार

मंडला महावीर न्यूज 29. शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत होते ही मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। जनजातीय कार्य विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी हालिया आदेशों ने वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी अतिथि शिक्षकों को बाहर होने की कगार पर ला खड़ा किया है। इसे लेकर अतिथि शिक्षक संगठन ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है।

नियमों के फेर में उलझी री-जॉइनिंग

अतिथि शिक्षक परिवार मण्डला के जिला अध्यक्ष एवं अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश के संस्थापक पी.डी. खैरवार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “पुराने अतिथि शिक्षकों को हटाने का सरकारी खेला” करार दिया है।

हाल ही में जारी आदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया:

  • जनजातीय कार्य विभाग के पत्र (दिनांक 04.07.2026) के अनुसार अब नियुक्तियां केवल eHRMS और GFMS पोर्टल पर दर्ज रिक्त पदों के आधार पर ही होंगी।
  • लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र (दिनांक 02.07.2026) में अतिथि शिक्षकों के लिए 90% ई-अटेंडेंस (ऑनलाइन उपस्थिति) की कड़ी अनिवार्यता लागू कर दी गई है।

“अनुभवी बाहर और नई भर्ती भी अटकी”

पी.डी. खैरवार का कहना है कि इन जटिल शर्तों के कारण वर्षों से अत्यंत कम मानदेय पर काम कर रहे अनुभवी अतिथि शिक्षक बाहर हो रहे हैं, वहीं नए आवेदकों की भर्ती भी समय पर नहीं हो पा रही है। उन्होंने मानदेय में होने वाली देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा, “जब 3-4 महीने तक मानदेय नहीं मिलता, तब सरकार को चिंता नहीं होती। अतिथि शिक्षकों के भी परिवार और सामाजिक दायित्व होते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन अटेंडेंस में तकनीकी दिक्कतें आती हैं, ऐसे में 90% उपस्थिति का मापदंड पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है।”

जटिल प्रक्रिया से बाधित हो रही पढ़ाई

नए नियमों के मुताबिक, अब SMDC रिक्त पदों की गणना करेगी और भर्ती GFMS पोर्टल के माध्यम से होगी। पोर्टल में तकनीकी समस्या आने पर DEO, सहायक आयुक्त और DPC की तीन सदस्यीय समिति ही नियुक्ति का फैसला करेगी। इस लंबी और जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण नियुक्तियों में भारी देरी हो रही है, जिससे प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों में पद खाली पड़े हैं और छात्रों की पढ़ाई का अपूरणीय नुकसान हो रहा है।

अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगें:

  • 90% उपस्थिति की अनिवार्यता को व्यावहारिक बनाया जाए और जमीनी हकीकत के आधार पर इसमें ढील दी जाए।
  • वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर री-जॉइनिंग कराई जाए।
  • किसी भी कारणवश सेवा से बाहर हुए पुराने शिक्षकों को भर्ती में पुनः प्राथमिकता मिले।
  • पोर्टल की तकनीकी उलझनों को दरकिनार कर भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

अतिथि शिक्षक संगठन ने सरकार और जिला शिक्षा प्रशासन से मांग की है कि छात्रों के भविष्य और अतिथि शिक्षकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए।


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