पहली बार हुई कूल्हे के जोड़ एसीटाबुलम की बेहद जटिल और सफल सर्जरी

मंडला जिला अस्पताल में चिकित्सा का नया इतिहास

पहली बार हुई कूल्हे के जोड़ एसीटाबुलम की बेहद जटिल और सफल सर्जरी

  • महानगरों जैसी सुपर स्पेशियलिटी सुविधा अब स्थानीय स्तर पर
  • सड़क हादसे में घायल 21 वर्षीय युवक को डॉक्टरों ने दिया नया जीवन

मंडला महावीर न्यूज 29. जिला चिकित्सालय मंडला ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने पहली बार एसीटाबुलम (कूल्हे के जोड़) की अत्यंत जटिल पोस्टेरियर वॉल फ्रैक्चर रिपेयर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह एक ऐसी उन्नत सर्जरी है, जो आमतौर पर बड़े महानगरों के कॉर्पोरेट या सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में ही संभव हो पाती है।जानकारी अनुसार बिछिया निवासी 21 वर्षीय करण बंजारा 16 जून 2026 को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल मंडला रेफर किया गया था। यहाँ गहन जांच में डॉक्टरों ने पाया कि करण के कूल्हे के जोड़ में एसीटाबुलम की पोस्टेरियर वॉल टूट चुकी थी और साथ ही हिप जॉइंट का पोस्टेरियर डिसलोकेशन (कूल्हा अपनी जगह से खिसकना) भी हुआ था। ऑर्थोपेडिक विज्ञान में इस प्रकार की चोट को बेहद संवेदनशील और जटिल माना जाता है।

चुनौतियों से भरा था ऑपरेशन, डॉक्टरों की टीम ने दिखाया कमाल 

इस ऑपरेशन में अस्थिरोग और निश्चेतना दोनों ही लिहाज से भारी तकनीकी चुनौतियाँ थीं। टूटी हुई हड्डियों के बारीक टुकड़ों को बिना किसी नस या रक्तवाहिनी को नुकसान पहुँचाए उनकी मूल स्थिति में स्थापित करना और कूल्हे के जोड़ को स्थिरता देना एक बड़ी चुनौती थी। इस असंभव कार्य को जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. हेमेन्द्र चौहान, डॉ. अनिल करपेटी एवं डॉ. अविनाश खरे की टीम ने बखूबी अंजाम दिया। लंबे चले इस ऑपरेशन के दौरान निश्चेतना प्रबंधन को डॉ. प्रवीण उइके एवं डॉ. सोनम चौरसिया ने बेहद सुरक्षित तरीके से संभाला। इसके साथ ही ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की पूरी टीम ने भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं देकर इस बड़ी सफलता में योगदान दिया।

महानगरों पर निर्भरता होगी कम 

एसीटाबुलम कूल्हे के जोड़ का वह मुख्य सॉकेट होता है, जिसमें जांघ की हड्डी फिट होती है। जिला अस्पताल स्तर पर इस तरह के जटिल केस का सफल ऑपरेशन होना पूरे मंडला जिले के लिए गौरव की बात है। इस बड़ी कामयाबी पर जिला चिकित्सालय के समस्त स्वास्थ्य विभाग ने सर्जिकल टीम को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था के बाद अब गंभीर ट्रॉमा मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं भागना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय इलाज मिल सकेगा।


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