मंडला की जामुन की मिठास सरहदों के पार और स्वाद लाजवाब
वनांचल के ग्रामीणों को मिल रहा आर्थिक मदद
- मंडला के जंगलों और खेतों में मौजूद हैं जामुन की 20 दुर्लभ प्रजातियां
- आयुर्वेद का खजाना, औषधीय गुणों से भरपूर फल बदल रहा ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मंडला महावीर न्यूज 29. देश के दिल मध्य प्रदेश का आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला इन दिनों बैंगनी रंग की अनूठी आभा और सौंधी मिठास से सराबोर है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले के बाजारों, ग्रामीण पगडंडियों और मुख्य राजमार्गों के किनारों पर जामुन के फलों की बहार देखी जा सकती है। केवल स्वाद के लिहाज से ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों और वनांचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के मामले में भी मंडला की जामुन अद्वितीय साबित हो रही है। यहाँ की जामुन का स्वाद न केवल मध्य प्रदेश के अन्य जिलों बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी बेहद पसंद किया जा रहा है।
जानकारी अनुसार जामुन का यह मौसम केवल स्वाद प्रेमियों के लिए ही उत्सव जैसा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए एक महा-वरदान की तरह है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार जामुन के पेड़ की छाल से लेकर इसके फल का गूदा और इसकी गुठलियां तक असाधारण गुणों से भरपूर हैं। यह फल मधुमेह, खून की कमी, पाचन तंत्र की जटिलताओं और यहाँ तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लडऩे में भी मानव शरीर की सहायता करता है। आहार विशेषज्ञों का मानना है कि मंडला जिले में प्रचुरता से उपलब्ध यह फल स्थानीय लोगों के लिए प्रकृति का एक अनमोल उपहार है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए व्यापक रूप से किया जाना चाहिए।
सीमित समय का व्यवसाय और बढ़ती मांग
स्थानीय व्यापारियों और जानकारों के अनुसार जामुन का यह प्राकृतिक फल बाजार में जून माह की शुरुआत से दस्तक देता है और जुलाई के प्रथम या द्वितीय पखवाड़े तक अपनी पूरी रंगत में रहता है। जुलाई के मध्य के बाद इसकी पैदावार स्वत: समाप्त हो जाती है। इस छोटे से अंतराल में ही वनांचल से भारी मात्रा में जामुन तोड़कर बाजारों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे विक्रय के लिए लाया जाता है। मंडला के जामुन की मिठास इतनी बेजोड़ है कि स्थानीय मांग पूरी होने के बाद इसे बड़े पैमाने पर दूसरे जिलों और राज्यों में भेजा जाता है। जब सीजन अपने चरम पर होता है और जामुन भारी मात्रा में पककर तैयार होती है, तब ग्रामीण इसे 60 से 70 रुपये प्रति कैरेट की दर से थोक व्यापारियों को बेचते हैं। मंडला से इन फलों को बसों तथा अन्य मालवाहक वाहनों के माध्यम से दूसरे जिलों के बड़े व्यापारियों तक त्वरित रूप से पहुँचाया जाता है। वर्तमान में खुदरा बाजार और हाईवे के किनारों पर यह जामुन 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर अच्छा आर्थिक लेन-देन हो रहा है।
वनांचल की महिलाओं को मिला सशक्त रोजगार
मंडला जिले में जामुन के कारोबार की एक सबसे खूबसूरत और अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ जामुन तोडऩे और उसे सहेजने का अधिकांश कार्य पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा किया जाता है। स्थानीय खरीदारों और व्यापारियों का मानना है कि महिलाएं जामुन को बहुत ही कोमलता और संभालकर तोड़ती हैं, जिससे नाजुक फल खराब नहीं होते और उनकी गुणवत्ता बनी रहती है। इस सीजन में जामुन तोड़कर बेचने वाले ग्रामीण प्रतिदिन औसतन 300 रुपये से अधिक की शुद्ध आमदनी कर लेते हैं। यह मौसमी व्यवसाय वनांचल के परिवारों के लिए उस समय एक बड़ा सहारा बनता है जब कृषि कार्य शुरुआती चरणों में होते हैं। शाम के वक्त गांवों से जामुन को कैरेटों में भरकर ट्रकों और अन्य वाहनों के जरिए रवाना किया जाता है, जो अगली सुबह पड़ोसी राज्यों और जिलों की बड़ी मंडियों में ताज़ा पहुँच जाता है। इस पूरे चक्र से न केवल ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि परिवहन व्यवसायियों और दलालों को भी अच्छा मुनाफा हो रहा है।
जिले के जंगल में है 20 प्रकार अनूठी प्रजातियां
वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार पूरे देश में जामुन की लगभग 40 प्रजातियां पाई जाती हैं। यह मंडला जिले के समृद्ध जैव-विविधता का प्रमाण है कि इनमें से 20 प्रकार की जामुन अकेले इस जिले के जंगलों और खेतों की मेड़ों पर प्राकृतिक रूप से मिल जाती हैं। स्वाद में मीठी और थोड़ी कसैली होने के बावजूद यह जामुन अपने औषधीय गुणों के कारण बेहद लोकप्रिय है। जिले के प्रमुख जामुन उत्पादक क्षेत्रों की बात करें तो खाल्हेगिठौरी, झुरकी पौड़ी, सहजर बनिया, घुटास, मवई, बिछिया, घुघरी, मोहगांव और चाबी जैसे क्षेत्रों में जामुन के वृक्षों की भारी भरमार है। इन क्षेत्रों से जामुन प्रतिदिन सिवनी, बालाघाट, जबलपुर समेत पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर तक भेजी जाती है। बड़े आकार की जामुन जैसे ही मंडियों में पहुँचती है, बड़े शहरों के दलाल और व्यापारी इसे ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए तैयार खड़े रहते हैं।
वन विभाग बढ़ा सकता है अपना राजस्व
बताया गया कि वर्तमान में मंडला से जो जामुन व्यापार के लिए बाहर जा रही है, वह मुख्य रूप से राजस्व क्षेत्रों और निजी खेतों की है। इसके विपरीत जिले के घने जंगलों के भीतर जामुन के हजारों वृक्ष मौजूद हैं जो हर साल फलते-फूलते हैं। लेकिन दुर्गम रास्तों और व्यवस्थित प्रबंधन के अभाव में इन जंगली वृक्षों के फलों को तोड़ा नहीं जाता, जिससे वे वहीं गिरकर सड़ जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। यही स्थिति पड़ोसी डिंडौरी जिले के अमरपुर और मेहंदवानी क्षेत्रों की भी है। बताया गया कि यदि मध्य प्रदेश वन विभाग इस दिशा में सकारात्मक पहल करे और शासकीय स्तर पर इन वनों में स्थित जामुन के वृक्षों के ठेके जारी करे, तो इससे विभाग के राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा यदि स्थानीय स्तर पर ही जामुन के पल्प से सिरका बनाने और इसकी गुठलियों से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करने के छोटे प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जाएं, तो स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को बारहमासी रोजगार मिल सकेगा।
आयुर्वेदिक चिकित्सा में छोटी जामुन की गुठली का विशेष महत्व
व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो बड़े शहरों के बाजारों में हमेशा बड़े आकार की जामुन की ही मांग अधिक रहती है। जंगल में मिलने वाली छोटी जामुन हालांकि मिठास के मामले में अद्वितीय होती है, लेकिन आकार छोटा होने के कारण बड़े बाजारों में उसे उचित दाम नहीं मिल पाते। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि पूर्व में छोटी जामुन खरीदने पर नागपुर जैसी बड़ी मंडियों में घाटा उठाना पड़ा था, जिसके कारण अब व्यापारी इसे खरीदने से बचते हैं। हालांकि आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में इस छोटी जामुन और इसकी गुठली का महत्व सबसे अधिक माना गया है। इसकी गुठली ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाली दवाओं के निर्माण में रामबाण सिद्ध होती है। यदि सरकार या कोई निजी संस्था इन छोटी जामुनों को सीधे एकत्र कर आयुर्वेदिक कंपनियों को इसकी गुठलियां सप्लाई करे और पल्प का उपयोग व्यावसायिक सिरका बनाने में करे, तो यह अनुपयोगी दिखने वाला फल भी वनांचल के लिए सोने की खान साबित हो सकता है। आवश्यकता है तो बस एक सुनियोजित नीति और प्रोत्साहन की, ताकि मंडला की इस प्राकृतिक संपदा का सही मूल्य स्थानीय आदिवासियों को मिल सके।
जामुन में है औषधीय गुण
जामुन में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन बी की प्रचुरता होती है। जामुन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, पाचन शक्ति को मजबूत करने और पेट संबंधी विकारों को दूर करने में यह बेहद गुणकारी है। जामुन से क्रोनिक बीमारियां से बचाव होता है, जिसमें मधुमेह नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य की रक्षा, अर्थराइटिस में राहत और रक्त शुद्धिकरण में सहायक होता है।










