कागजों में अमृत, धरातल पर खानापूर्ति का आरोप
मुडढा झीला अमृत सरोवर निर्माण में भारी लापरवाही
- 50 साल पुराने तालाब के नाम पर शासकीय राशि की खेली होली
- समाजसेवियों और ग्रामीणों ने की नए सिरे से निर्माण की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. विकासखंड नारायणगंज के अंतर्गत ग्राम मुडढा झीला में नवीन अमृत सरोवर तालाब के निर्माण कार्य में तकनीकी प्राक्कलन को ताक पर रखकर घोर लापरवाही बरतने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों और स्थानीय समाजसेवियों ने जब मौके पर पहुंचकर मुआयना किया, तो निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और गुणवत्ताहीनता उजागर हुई। इस मामले को लेकर अब क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच और तालाब के नए सिरे से सुदृढ़ीकरण की मांग की है।
बताया गया कि मौका मुआयना करने पहुंचे सरपंच रूप सिंह पंद्राम, समाजसेवी रामलाल कुलस्ते, रामेश्वर वरकड़े, धर्म कुलस्ते, प्रमोद यादव, ओमकार यादव, बाबूलाल यादव और शिक्षक हरि बरकडे सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान पर लगभग 50 वर्ष पूर्व एक पुराना तालाब था, जिसे अब नवीन अमृत सरोवर का रूप दिया जा रहा था। तकनीकी एस्टीमेट के अनुसार तालाब की नींव को लगभग 3 मीटर चौड़ी और 3 मीटर गहरी खोदकर उसमें काली मिट्टी व पानी डालकर लौंदे (क्ले कोर) बनाने थे और इंजन व रोलर से दबाकर उसके ऊपर मिट्टी-मुर्रम डालनी थी। इसके विपरीत जिम्मेदारों ने पुरानी मेढ़ पर ही थोड़ी मिट्टी-मुर्रम डालकर ऊपर से सिर्फ ट्रैक्टर चला दिया।
की गई घोर अनियमितताएं
बताया गया कि निर्माण स्थल पर पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म करते हुए कोई भी आधिकारिक सूचना पटल या बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे कार्य की लागत और तकनीकी विवरण गुप्त रहे। तालाब के अंदर जमी पुरानी मिट्टी की साफ-सफाई और गहरीकरण का कार्य नाममात्र का भी नहीं किया गया है। एस्टीमेट के आधार पर तालाब की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का ध्यान नहीं रखा गया है, जिससे यह पहली बारिश में ही ढहने की कगार पर है।
वन्यजीवों और कई गांवों के निस्तार पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब केवल मुडढा झीला ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्राम धनगांव, तरवानी, बबलिया और देवरी कला के ग्रामीणों व उनके मवेशियों के पानी का मुख्य जरिया है। साथ ही वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहाँ वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के लिए भी पानी का यही एकमात्र सुगम साधन था। शासन की राशि का दुरुपयोग होने से अब पूरे क्षेत्र के जल संकट से जूझने की आशंका बढ़ गई है।
पुनर्निर्माण और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के समस्त समाजसेवियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि इस गुणवत्ताविहीन आधे-अधूरे कार्य की जांच कराई जाए। तालाब का बाकी बचा निर्माण कार्य, गहरीकरण और अंदर की मिट्टी की सफाई अविलंब एस्टीमेट के अनुसार पुन: कराई जाए, जिससे आगामी वर्षाकाल में विधिवत जलभराव हो सके और क्षेत्र की जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।










