185 शिक्षकों को सिखाए गए दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के गुर
नारायणगंज में 5 दिवसीय समावेशित शिक्षा प्रशिक्षण आयोजित
- ब्रेल लिपि, सांकेतिक भाषा और विशेष तकनीकों से लैस हुए शिक्षक
- मुख्यधारा से जुड़ेंगे विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
मंडला महावीर न्यूज 29. आकांक्षी विकासखण्ड योजना के अंतर्गत चयनित विकासखण्ड नारायणगंज में जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार समावेशित शिक्षा के तहत शिक्षकों का पाँच दिवसीय मल्टी-कैटेगरी प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। 9 जून से 13 जून तक शासकीय मॉडल स्कूल कुड़ामैली में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन नारायणगंज सीईओ श्रद्धा सोनी के कुशल नेतृत्व में किया गया। जिला परियोजना समन्वयक कुलदीप कटहल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
विकासखण्ड एमआरसी शेख इरफान ने बताया कि इस कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने वाले 173 शिक्षकों और 12 जन शिक्षकों सहित कुल 185 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों के शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की मूल अवधारणा, ब्रेल लिपि, सांकेतिक भाषा तथा आधुनिक विशेष शिक्षण तकनीकों से अवगत कराना था।
संवेदनशील व्यवहार और 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान पर दिया जोर
पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों ने जोर दिया कि दिव्यांग बच्चों का सामान्य बच्चों की तरह ही शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। शिक्षकों को निर्देशित किया गया कि वे इन बच्चों की विशेष आवश्यकताओं को समझते हुए उनके साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करें। प्रशिक्षण में शिक्षकों को व्यावहारिक ज्ञान, मूल्यांकन पद्धति, आईईपी निर्माण, पहचान के अंतर्गत ब्रेल लिपि का उपयोग और सांकेतिक भाषा का लाइव प्रशिक्षण। बच्चों के अधिगम (सीखने के) स्तर का सटीक मूल्यांकन करना। प्रत्येक दिव्यांग बच्चे के लिए व्यक्तिगत शैक्षिक कार्यक्रम तैयार करना। 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की समय पर पहचान और उनके अनुरूप शिक्षण पद्धतियां सिखाई गई।
दिव्यांग विद्यार्थियों में होती है अपार प्रतिभा
समापन समारोह को संबोधित करते हुए जिले के समावेशित शिक्षा प्रभारी व सहायक परियोजना समन्वयक केके उपाध्याय ने कहा कि समावेशित शिक्षा केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक बच्चे को समान अवसर प्रदान करने का संकल्प है। दिव्यांग विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा होती है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित मार्गदर्शन और अनुकूल वातावरण देने की है। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं बीआरसी कमलेश भवेदी और शिक्षा समिति के अध्यक्ष अविनाश शर्मा ने भी शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए इसे विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
मास्टर ट्रेनर और अधिकारी रहे मौजूद
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संदीप सोनी, प्रशांत वैद्य, अरविंद यादव, सीमा यादव, शेख इरफान, पंकज उईके, शंकरिया उईके एवं शालिनी ठाकुर ने बतौर मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समापन के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय कुड़ामैली के प्राचार्य एडमोन लकणा, मॉडल स्कूल के प्राचार्य चिंतामणि वैष्णव, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी राजेश विश्वकर्मा, बीएसी चरनलाल झारिया, राजीव वर्मा और नवनीता दुबे सहित अनेक शिक्षाविद् उपस्थित रहे। प्राचार्य लकणा ने कहा कि इस शिक्षा का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों में हीनता की भावना को समाप्त कर उनका सर्वांगीण विकास करना है।
प्रेरक संदेश के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन को साझा करते हुए शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया। जिसमें ईश्वर जिन्हें चाहता है, उन्हें माता-पिता बना देता है और जिन्हें वह अधिक चाहता है, उन्हें शिक्षक बना देता है। इस प्रेरक संदेश के साथ सभी शिक्षकों से समर्पण, संवेदनशीलता और धैर्य के साथ विशेष बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में जुटने की अपेक्षा की गई। अंत में एमआरसी शेख इरफान ने सभी सहयोगियों और प्रतिभागी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।









