हटाने की धमकी के बाद भी नहीं झुके कर्मचारी, आंदोलन पर अड़े

चौथे दिन भी जारी रही संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल

हटाने की धमकी के बाद भी नहीं झुके कर्मचारी, आंदोलन पर अड़े

  • टीकाकरण ठप और जननी सुरक्षा योजना के भुगतान अटके
  • मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी न होने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश

मंडला महावीर न्यूज 29। अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई बेमियादी हड़ताल चौथे दिन शुक्रवार को भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रही। इस आंदोलन का अब जिला सहित ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक और सीधा असर देखने को मिल रहा है। हड़ताल के चलते कई उप स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण का कार्य पूरी तरह ठप रहा, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों की आवश्यक जांच व स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

घोषणा के एक साल बाद भी आदेश न होने से नाराजगी

संविदा स्वास्थ्य संगठन के जिला संयोजक अर्जुन सिंह ने बताया कि यह आंदोलन मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को धरातल पर लागू करवाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2025 में संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह सभी आवश्यक सुविधाएं देने की घोषणा की गई थी। इसके बावजूद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्य प्रदेश द्वारा एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस घोषणा को पूरा नहीं किया गया है। विभाग द्वारा केवल बैठकों का दौर चलाया जा रहा है, जिससे तंग आकर संविदा कर्मी इस कड़े आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं।

सरकारी योजनाओं के भुगतान अटके, ऑनलाइन एंट्री प्रभावित

चार दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग और हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन पर गहरा असर पड़ा है। शुक्रवार को मैदानी स्तर पर ऑनलाइन डाटा एंट्री का कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। इसके साथ ही ‘जननी सुरक्षा योजना’ और ‘प्रसूति सहायता योजना’ के अंतर्गत दिए जाने वाले गरीब महिलाओं के भुगतान भी अटक गए हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में एनपीएस (NPS) का लाभ, स्वास्थ्य बीमा की सुविधा, प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि और ग्रेड-पे में उचित सुधार शामिल हैं।

अधिकारियों के दबाव के आगे नहीं झुके कर्मचारी

हड़ताल को दबाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश के उच्च अधिकारियों द्वारा संविदा कर्मियों को सेवा से पृथक (टर्मिनेशन) करने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं। प्रशासनिक स्तर से हड़ताल समाप्त करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन संविदा कर्मियों ने दोटूक शब्दों में पीछे हटने से इनकार कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि संगठन केवल उन्हीं मांगों को लेकर लड़ रहा है जिनकी घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री ने की थी, इसलिए वे किसी भी दमनकारी नीति या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।


Leave a Comment