मंडला में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से हाहाकार

मंडला में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से हाहाकार

अस्पताल सूने, स्वास्थ्य योजनाओं की मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग पूरी तरह ठप

  • हड़ताल के तीसरे दिन संविदा कर्मियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
  • बच्चों का टीकाकरण, सिकलसेल जांच और लेबर रूम के काम बंद

मंडला महावीर न्यूज 29. अपनी लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत जिले के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संविदा कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएं व सरकारी योजनाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ गई हैं। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार के कारण जिला अस्पताल, ब्लॉक यूनिट, सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों का संपूर्ण ऑनलाइन व ऑफलाइन कामकाज ठप हो गया है। एक तरफ जहां मरीज इलाज और जांच के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय समीक्षा बैठकें और सरकारी पोर्टलों पर आंकड़ों का गणित भी पूरी तरह गड़बड़ा गया है।हड़ताल के तीसरे दिन आंदोलनकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर समर्थन की मांग की। इस दौरान श्री मिश्रा ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों से संबंधित पत्र को वे सीधे स्वास्थ्य मंत्री तक प्रेषित करेंगे। संविदा स्वास्थ्य संगठन के जिला अध्यक्ष अमित तिवारी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से विभाग में पूरी ईमानदारी से सेवाएं दे रहे हैं। हर बार आंदोलन के बाद हमें सिर्फ विचार-विमर्श का लॉलीपॉप थमा दिया जाता है। नीतियां तो बनती हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू नहीं किया जाता। यहाँ तक कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं भी अब तक अधूरी हैं।

ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद 

इस बेमियादी हड़ताल का सबसे घातक असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। सामुदायिक, प्राथमिक और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद हैं। सरकारी महकमे के महत्वपूर्ण अनमोल और यू-विन पोर्टल पर डेटा एंट्री का काम पूरी तरह रुक गया है। इसके अलावा बच्चों का नियमित टीकाकरण, सिकलसेल जांच, टीबी यूनिट और एनसीडी क्लीनिक बंद पड़े हैं। ऑनलाइन एम्बुलेंस प्रबंधन, इमरजेंसी ऑनलाइन एमएलसी, पोस्टमार्टम सेवाएं, लेबर रूम, पीएनसी वार्ड, एनआरसी और गर्भवती महिलाओं की जरूरी जांचें नहीं हो पा रही हैं। राष्ट्रीय कार्यक्रमों की साप्ताहिक व प्रतिदिन की रिपोर्टिंग और हितग्राही मूलक योजनाओं का भुगतान भी पूरी तरह अटक गया है।

गंभीर बीमार बच्चों की सर्जरी अधर में लटकी 

जिला मुख्यालय की जिला योजना प्रबंधन यूनिट पर ताले लटकने से राज्य स्तर से होने वाली ऑनलाइन समीक्षा बैठकें बाधित हो गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से जन्म से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग का कार्य बंद हो गया है, जिससे गंभीर बीमारियों से चिह्नांकित बच्चों की सर्जरी अधर में लटक गई है। वर्तमान में जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड, शिशु गहन चिकित्सा इकाई, टीबी विभाग, मन कक्ष और एनआरसी यूनिट पूरी तरह खाली पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, ओपीडी वितरण केंद्र, लैब जांच, सीएम हेल्पलाइन का निराकरण और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे अति-आवश्यक नागरिक कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।


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