सुप्रीम कोर्ट की ‘ओपन कोर्ट’ में 13 मई को होगी निर्णायक सुनवाई

टीईटी मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट की ‘ओपन कोर्ट’ में 13 मई को होगी निर्णायक सुनवाई

  • रिटायर्ड चीफ जस्टिस रविशंकर झा करेंगे शिक्षकों की पैरवी
  • 70 हजार शिक्षकों के भविष्य पर फैसला मुमकिन

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़े शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन (TWTA) द्वारा दायर रिव्यू पिटिशन पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओपन कोर्ट में 13 मई को सुनवाई सुनिश्चित हुई है। इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में एसोसिएशन की ओर से सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री रविशंकर झा पैरवी करेंगे।

एसोसिएशन ने सिविल अपील नंबर 1385/2025 में 1 सितंबर 2025 को पारित निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन संख्या 27488/2026) दायर की है। शिक्षकों का तर्क है कि पिछले फैसले में राज्य सरकार और शिक्षकों का पक्ष पूरी तरह नहीं सुना गया। प्रदेश अध्यक्ष डी.के. सिंगौर के अनुसार, टीईटी का प्रावधान आरटीई एक्ट-2009 के मूल ढांचे में नहीं था, बल्कि इसे 2010 की अधिसूचना से लागू किया गया, जिसमें सेवारत शिक्षकों के लिए स्पष्ट छूट (Exemption) का प्रावधान था।

डीके सिंगौर, संयुक्त मोर्चा, प्रांतीय संयोजक

याचिका में रखे गए प्रमुख तर्क

  • भूतलक्षी प्रभाव पर आपत्ति: एसोसिएशन का कहना है कि 1998 से कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी को भूतलक्षी (Retrospective) रूप से लागू करना नियम विरुद्ध है।
  • नियमों में छूट: 3 सितंबर 2001 से पूर्व नियुक्त और 2010 तक नियुक्त प्रशिक्षित शिक्षकों को नियमों के तहत टीईटी से मुक्त रखा गया है।
  • आजीविका पर संकट: मध्य प्रदेश के ट्राइबल वेलफेयर विभाग में कार्यरत लगभग 70,000 शिक्षक, जो दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं, टीईटी की अनिवार्यता के कारण सेवा समाप्ति के डर के साये में हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

पिटिशन में उल्लेख किया गया है कि यदि इन अनुभवी शिक्षकों को टीईटी के आधार पर हटाया जाता है, तो आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। अधिकांश शिक्षक सेवा के उस पड़ाव पर हैं जहाँ वे वर्तमान मानकों के अनुसार परीक्षा देने के पात्र भी नहीं हैं। साथ ही, 2018 में शासकीय सेवक बनने के कारण उन्हें पहले ही सीमित लाभ मिल रहे हैं, ऐसे में सेवा समाप्ति उनके परिवारों के लिए आर्थिक त्रासदी साबित होगी।

दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत

एसोसिएशन ने अपनी याचिका के समर्थन में पेंशन, ग्रेच्युटी, लोन और 8,818 सदस्यों की सूची सहित कुल 31 महत्वपूर्ण संलग्नक प्रस्तुत किए हैं। एसोसिएशन को विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों के अधिकारों और शिक्षा की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय सुनाएगा।

पूरे प्रदेश के शिक्षकों की निगाहें अब 13 मई को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि दशकों से सेवाएं दे रहे गुरुजी और शिक्षक अपने पदों पर बने रहेंगे या नहीं।


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