अंधेरा होते ही सहस्त्रधारा में सन्नाटा

  • अंधेरा होते ही सहस्त्रधारा में पसर जाता है सन्नाटा
  • अंधेरा होते ही सहस्त्रधारा में सन्नाटा
  • शहर के नजदीक फिर भी प्रकाश की नहीं हैं व्यवस्था
  • सुविधाओं के अभाव में दोबारा आने में संकोच करते है पर्यटक
  • रात के समय यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं


मंडला महावीर न्यूज 29. मां नमर्दा के तट मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों से भर पूर हैं। लेकिन विकास कार्य के अभाव में लोगों की पहुंच से दूर हो रहे हैं। सुरक्षित व सुविधाजनक न होने के कारण लोग ऐसे क्षेत्रों में जाना भी नहीं चाहते हैं। जिससे कभी रौनक से भरे पर्यटक क्षेत्र में रौनक कम होते जा रही है। इन्ही में एक सहस्त्रधारा भी उपेक्षा का शिकार हो रहा है। जिला मुख्यालय से करीब पांच किमी दूर पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा स्थित है। यहां काली चट्टानो के बीच कलकल बहती नर्मदा की धारा का अद्भूत नाजारा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुकून देता है।

गर्मी के दिनो में शाम के समय लोग प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेने पहुंचते हैं। सौंदर्य को देखकर पर्यटक यहां बार-बार आने का मन तो बनाते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में दोबारा आने में संकोच कर रहे हैं। यह पर्यटन स्थल मंडला शहर के सबसे कम दूरी पर स्थित है। जिसके कारण यहां स्थानीय लोगों के साथ दूर-दूर से भी लोग पहुंचते है। लेकिन रात के समय यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं रहता है। दरअसल यहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसका फायदा आसामाजिक तत्व भी उठाते हैं। यहां निर्मित प्रतिक्षालय व आसपास पत्थरों में अंधेरा होते ही नशे के आदि युवकों का समूह दिखाई देने लगता है।

सहस्त्रधारा में नर्मदा का बैक वाटर के बीच शिव मंदिर है। यहां पहुंचने के लिए ब्रिज बना है। जिसके कारण यहां आने वाले पर्यटक ब्रिज पर खड़े होकर काली चट्टानो के बीच से कलकल बहती नर्मदा के प्राकृति सौंदर्य को निहारते है। यहां अद्भुत नाजारा दिखाई देता है। पानी कम होने के बाद मंदिर के नीचे घाट तक लोग सीढ़ी के माध्यम से पहुंच रहे हैं। गर्मी के दिनो में भी नहाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। यहां गहराई दर्शाने के लिए कोई सूचना बोर्ड नहीं लगा है। यहां घूमने आने वाले ज्यादातर लोग गहराई से अंजान होते हैंं। वाटर फॉल में नहाने का आनंद लेने के के साथ नर्मदा की गहराई में तैराने का आंनद उठाते हैं। जो उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। समान्य दिनो में भी यहां भीड़ बनी रहती है।

मार्ग दुरस्त होने व टीन शेड निर्माण के बाद यहां लोगों को कुछ राहत तो मिली है। लेकिन पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है। जिसके कारण पर्यटकों को समस्या का समाना करना पड़ता है। यहां पेयजल की व्यस्था नहीं है। नर्मदा नदी के पानी से लोग प्यास बूझा रहे हैं। कुछ असहाय लोग नर्मदा तट तक नहीं पहुंच पाते हैं। उन्हें यहां गन्ना के जूस बेचेने वाले से पानी मंगना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सुविधाएं नहीं होने के कारण पर्यटकों की संख्या कम है, यदि यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो जाए तो आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाएगी।

ये हुए विकास कार्य :
सहस्त्रधारा के प्राकृति सौंदर्य को देखने के लिए एक वॉच टावर भी बनाया गया है। इसके साथ गर्मी और बारिश के दिनों में आने वाले पर्यटकों के लिए अलग-अलग टीन शेड बनाए गए है। जिससे पर्यटकों को बारिश और तेज में सुविधा मिल सके। प्रकाश की व्यवस्था के लिए यहां पोल लगाकर बिजली पहुंचाने का प्रयास किया गया। लेकिन बिजली नहीं पहुंची है। कुछ विद्युत पोल टूट गए हैं तो कुछ उखड़ गए हैं। रात में यहां अंधेरा ही रहता है। बता दे कि यहां लगा गए पोल बारिश की बाढ़ में गिर गए है। जिसके कारण इसमें लगी विद्युत केबल गायब हो गई है। यहां बनाया गया सुविधाघर वॉटर फॉल से करीब एक किमी दूर स्थित है। जिसकी हालत भी बदहाल हो गई। दरवाजे-खिड़की टूट गए हैं। अंदर भी असामाजिक तत्वों ने तोड़ फोड़ की है। जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को समस्या का सामना करना पड़ता है।

पर्यटकों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं :
यहां चारों तरफ काले पत्थर स्थित है और इनके बीच से कलकल करती नर्मदा की धारा पर्यटकों को यहां बार-बार आने मजबूर करती है। इन नाजारों को पर्यटक अपने कैमरे में कैद करने मजबूर हो जाते है। जिससे पर्यटक सेल्फी लेने के लिए इन चट्टानों के बीच अथाह गहराई के किनारे जाते है और नर्मदा के किनारे में खड़े होकर सेल्फी लेते है। यहां लोगों की जरा सी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है, लेकिन यहां इसके लिए समझाईश देने वाला कोई नहीं रहता है। जिससे बड़ा हादसा भी घटित हो सकता है। यहां नये घाट निर्माण के साथ नर्मदा के बीचों बीच स्थित मंदिर में नई रैलिंग लगाने की जरूरत है।

पुल के पास घाट, वाटर फॉल तक पहुंचेगी सड़क
क्षेत्रीय जनपद सदस्य अजीत सिहानी ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से यहां करीब डेढ़ करोड़ की लागत से कुछ विकास कार्य कराए जाने हैं। इसमें पुल के पास घाट का निर्माण कराया जाएगा। जिसका ले ऑउट डल गया है। मटेरियल भी पहुंचने लगा है। बारिश के पूर्व निर्माण पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही वॉटर फॉल तक वर्तमान में पत्थरों के कारण पहुंचने में परेशानी होती है। इसके लिए यहां एक कांक्रीट मार्ग बनाया जाएगा। इसके बाद कुछ स्थानों को सीमेंटीकरण कर समतल किया जाएगा। ताकि वाटर फाल तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। आने वाले दिनो में प्रकाश की व्यवस्था के लिए प्रयास करेंगे। सौलर ऊर्जा के माध्यम से प्रकाश की व्यवस्था की जा सकती है। पर्यटकों की सुविधाओं के लिए अन्य कार्य भी कराए जाएंगे।


 

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