बबलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल, तिरपाल के सहारे चल रहा अस्पताल
दीवारों में उतरा करंट, मरीजों और कर्मचारियों की जान जोखिम में
- जर्जर भवन के कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप
- मलेरिया से मौत के बाद भी 50 गांवों की सेहत भगवान भरोसे
मंडला महावीर न्यूज 29. विकसखंड नारायणगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बबलिया इन दिनों खुद बीमार नजर आ रहा है। बरसात के मौसम में अस्पताल का भवन इस कदर जीर्ण-शीर्ण हो चुका है कि यहां मरीजों का इलाज करना तो दूर, कर्मचारियों का बैठना भी मुश्किल हो गया है। हाल ही में अस्पताल की बदहाली की खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में भवन के ऊपर तिरपाल लगाकर खानापूर्ति कर दी है, लेकिन यह उपाय पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
जानकारी अनुसार लंबे समय से इस भवन के लेंटर और दीवारों में पानी रिसने के कारण अस्पताल में भारी नमी बनी हुई है। हालात इतने गंभीर हैं कि दीवारों और पंखों में करंट आने लगा है। जिसके कारण किसी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए अस्पताल की लाइट और पंखों का कनेक्शन काटना पड़ा है। भवन के अंदर पानी टपकने के कारण ब्लड जांच कक्ष और दवा भंडार कक्ष की स्थिति भी दयनीय हो गई है। जब अस्पताल का भवन ही सुरक्षित नहीं है, तो वहां रखी जीवनरक्षक दवाइयों और उपकरणों के सुरक्षित रहने पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए सुरक्षित जगह ही नहीं बची है। इस कारण प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को नारायणगंज रेफर किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाएं न मिलने के कारण क्षेत्र के गरीब परिवारों को आवागमन और निजी अस्पतालों के इलाज में भारी आर्थिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
मलेरिया का बढ़ता खतरा और प्रशासन की अनदेखी
इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप भी पैर पसार रहा है। हाल ही में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के समीपस्थ ग्राम साजपानी में एक युवक की मलेरिया से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के लगभग 50 से 60 गांवों के लोग निर्भर हैं, लेकिन वर्तमान में सभी स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो चुकी हैं।
ग्रामीणों ने की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक अस्पताल भवन की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए तत्काल किसी सुरक्षित स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही मलेरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूरे क्षेत्र में दवाइयों का छिड़काव कराने और प्राथमिक व उप-स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, जिससे ग्रामीणों को सुचारू रूप से स्वास्थ्य लाभ मिल सके।








