रंगरेज घाट में भरा कजलियां मेला

भाईचारे के साथ मनाई कजलियां

कजलियां के प्रति बच्चों में रहा उत्साह

  • रंगरेज घाट में भरा कजलियां मेला
  • दूसरे दिन भी बहनों ने बांधी राखी

मंडला महावीर न्यूज 29. रंगरेज घाट में कजलियां मेला पराम्परागत रूप से भरा गया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहां मेले का आयोजन रंगरेज घाट के गांधी मैदान में किया गया। कंजलिया मेले में लोग उत्साह के साथ कजलिया विसर्जन के लिए पहुंचे। मेला स्थल पर पहुंचे लोगों में उत्साह देखा गया। इस वर्ष परंपरागत रूप से यह मेला प्रतिवर्षानुसार लगा। रंगरेज घाट के गांधी मैदान व आसपास के स्थल में मेला आयोजन किया गया।मेले में तरह-तरह की दुकानें सजाई गई। सड़क के आसपास दुकानें लगाई गई थी, स्थान के अभाव के कारण मेला स्थल पर झूले कम लगाये गये थे। फिर भी लोगों ने बढ़-चढ़कर मेले में शिरकत की। शहर सहित आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में लोग मेले में आये। शाम से मेले की रंग्गत बढऩे लगी। सुरक्षा के लिहाज से रंगरेज घाट तथा मेला स्थल पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। घाट में गोताखोर तैनात किये गये थे।

भाईचारे के साथ मनाई कजलियां 

रक्षा बंधन के पूर्व घरों में बोए गए कजलियों का विधि विधान के साथ विसर्जन किया गया। हिन्दु परम्परा के अनुसार रक्षा बंधन के दूसरे दिन आपसी भाईचारे का त्यौहार कजलियां पूरे जिले में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लोग अपने-अपने घरों में बोए गए कजलियां की नित पूजन-अर्चन किया जाता है। जिसका संध्याकाल में जलाशयों एवं नदी तट में कजली विसर्जन कर अन्न देवता से अच्छी फसल के लिय प्रार्थना की गई। लोगों ने रंगरेज घाट, रपटा घाट, रंगरेज घाट, नांव घाट, नाना घाट, दादा धनीराम घाट आदि नर्मदा तटों में कजनियां विसर्जित की तथा मां नर्मदा का पूजन अर्चन किया।

होती है धन धान्य की कामना 

ग्रामीण अंचलों में कजलियों का एक विशेष महत्व होता है। रक्षा बंधन के 8 दिन पूर्व कजलियों को घरों के पूजा स्थान में बोया जाता है। जिसका रक्षाबंधन के दूसरे दिन समीपी जलस्त्रोतों में विसर्जन किया जाता है और कुछ कजलियों को बचाकर अपने मित्रों सहेलियों, माता पिता सहित अन्य बड़े बुजुर्गों के कान एवं हाथ में रखकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। रामकुमार कछवाहा ने बताया कि कजलियां का पर्व अच्छी फसल होने की कामना के लिए मनाया जाता है। घर में बोए जाने वाले कजलियों के साथ हम खेत की मेढ़ में भी पूजा करते है। जिससे की खेतों में अच्छी पैदावार हो सके।

सहस्त्रधारा में रही रौनक 

राखी पर्व के चलते शहर के समीपस्थ पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा में खासी रौनक रही। लोग सहस्त्रधारा में नर्मदा के व्यापक स्वरूप को निहारने पहुंचे। कजलियां पर्व में भी लोगों ने इस पर्यटन स्थल का भ्रमण किया। सहस्त्रधारा पिकनिक स्पॉट में पहुंचकर लोगों ने मस्ती की। बरसात के चलते नर्मदा का जल स्तर बढ़ गया था, जिससे सहस्त्रधारा का सौंदर्य और निखर रहा था। लोगों ने प्रकृति की इस खूबसूरती को अपने कैमरें में कैद कर लिया।

दूसरे दिन भी बहनों ने बांधी राखी 

इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर भद्राकाल का साया नहीं रहा। जिसके कारण जिले भर में रक्षाबंधन पर्व की रौनक दिनभर रही। बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने सुबह से अपने भाईयों के घर पहुंची और शुभ मुहूर्त में राखी बांधी। कुछ क्षेत्रों में रात्रि 09 बजे तक चहल पहल देखी गई। वहीं कुछ बहनें दूरी अधिक होने के कारण रक्षाबंधन के दिन राखी नहीं बांध पाई, दूसरे दिन कजलिया पर्व के दिन भी बहनों ने रक्षाबंधन पर्व मनाया। इस दिन भी बहनों ने अपने भाईयों को राखी बांधने अपने भाईयों के पास पहुंची।


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