वनांचल क्षेत्र मवई बना पशु तस्करों का सुगम मार्ग

वनांचल क्षेत्र मवई बना पशु तस्करों का सुगम मार्ग

पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

  • रक्षाबंधन पर ग्रामीणों ने पकड़े मवेशियों से भरे वाहन
  • इमारती लकड़ी की अवैध कटाई से भी खोखले हो रहे जंगल

मंडला महावीर न्यूज 29.  मंडला जिले के अंतिम छोर पर स्थित वनांचल क्षेत्र मवई इन दिनों अवैध गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर तस्कर मवेशियों की अवैध आवाजाही और जंगलों की कटाई को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की लचर निगरानी के कारण मवई तस्करों के लिए एक सुरक्षित और सुगम रास्ता बन गया है।

तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रही कनेक्टिविटी

मवई मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर एक तरफ छत्तीसगढ़ (कवर्धा जिला) और दूसरी तरफ डिंडोरी जिले की सीमा लगती है। इसके अलावा, यहां से जबलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग और बिछिया क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग भी निकलते हैं। चारों दिशाओं में सड़कों की इसी कनेक्टिविटी का फायदा उठाकर डिंडोरी और छत्तीसगढ़ की ओर से मवेशियों को वाहनों तथा पैदल मार्गों से ले जाया जा रहा है।

रक्षाबंधन पर ग्रामीणों ने पकड़े संदिग्ध वाहन

28 अगस्त (रक्षाबंधन) की सुबह ग्रामीणों ने मवई-डिंडोरी मार्ग पर करीब 10 किलोमीटर दूर और मवई-घुटास मार्ग पर अंजनी के पास मवेशियों से भरे आयशर वाहनों को रोका। घटना के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी पुलिस काफी देर से मौके पर पहुंची और कोई ऐसी सख्त कार्रवाई नहीं की गई जिससे भविष्य में इन गतिविधियों पर लगाम लग सके।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जब आम लोगों को संदिग्ध वाहनों की जानकारी मिल जाती है, तो पुलिस और प्रशासन का सूचना तंत्र क्यों नाकाम साबित हो रहा है? पुलिस की अधिकांश कार्रवाई तभी होती है जब या तो कोई दुर्घटना हो जाए या ग्रामीण खुद वाहन पकड़कर पुलिस को सौंपें। कुछ महीने पहले भी स्थानीय युवाओं ने आधी रात को मवेशी तस्करों को पकड़कर मवई थाने में प्रदर्शन किया था, लेकिन स्थिति फिर जस की तस हो गई है।

अवैध कटाई से घट रहा जंगलों का घनत्व

पशु तस्करी के साथ-साथ मवई का वन क्षेत्र इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई का भी दंश झेल रहा है। कभी सरई और साल के घने पेड़ों के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब जंगलों का घनत्व तेजी से कम हो रहा है। साल की लकड़ी से बने फर्नीचर की भारी मांग के चलते अवैध लकड़ी कारोबार भी धड़ल्ले से जारी है, जिस पर वन विभाग की चुप्पी संदिग्ध है।

ग्रामीणों की मांग

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि डिंडोरी और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे सभी प्रमुख मार्गों पर नियमित जांच चौकियां स्थापित की जाएं, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध वाहनों की सघन चेकिंग हो। तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि वनांचल क्षेत्र में पनप रहे इस अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।


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