पौराणिक मंगलेश्वर महादेव, जहां शिव पुत्र मंगल ने की थी पिंडी की स्थापना

पौराणिक मंगलेश्वर महादेव, जहां शिव पुत्र मंगल ने की थी पिंडी की स्थापना

  • सावन में आस्था का प्रमुख केंद्र बना महाराजपुर का मंगलेश्वर महादेव मंदिर
  • उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, सावन में हो रहा विशेष जलाभिषेक

मंडला महावीर न्यूज 29. सावन के पवित्र माह पर महाराजपुर के ज्वालाजी वार्ड स्थित प्राचीन मंगलेश्वर महादेव मंदिर शिवभक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मां नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित इस प्राकृतिक और रमणीय शिवधाम में इन दिनों प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचकर बाबा मंगलेश्वर का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर परिसर से मां नर्मदा के विहंगम दर्शन श्रद्धालुओं को असीम आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पवित्र तीर्थ की स्थापना स्वयं भगवान शंकर के पुत्र मंगल ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने नर्मदा तट पर कठोर तपस्या की थी और मंगलवार के दिन अपने हाथों से यहां शिव पिंडी स्थापित की थी। इसी कारण यह पवित्र स्थान मंगलेश्वर के नाम से विख्यात हुआ। इस तीर्थ की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का प्रमाण नर्मदा पुराण सहित अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है।

मंदिर से जुड़ी विशेष आस्थाएं और जनश्रुतियां 

प्रवचनकर्ता पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि मंगलेश्वर महादेव केवल एक प्राचीन तीर्थस्थल नहीं है, बल्कि यह भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला एक जाग्रत केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान शिव को केवल एक लोटा जल अर्पित करने मात्र से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। श्रद्धालुओं में यह विशेष विश्वास है कि मंगलवार के दिन पडऩे वाली चतुर्थी पर यहां पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार आज भी सर्प देव प्रतिदिन मां नर्मदा को पार करके बाबा मंगलेश्वर के दर्शन करने आते हैं।

लुप्त हो चुके हैं प्राचीन कुंड 

इतिहास के पन्नों में मंदिर से जुड़े प्राचीन तीर्थों जैसे पाप मोचन कुंड व नानाघाट के समीप स्थित ऋण मोचन तीर्थ का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि नर्मदा नदी के लगातार कटाव के कारण ये स्थल अब लुप्त हो चुके हैं। मंदिर का वर्तमान स्वरूप नब्बे के दशक में हुए जीर्णोद्धार के बाद का है।

भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र

वर्तमान में मंदिर समिति द्वारा सावन माह में विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। महाशिवरात्रि के साथ पूरे सावन महीने में यहां सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे पूरा क्षेत्र शिवभक्ति के पवित्र वातावरण से ओत-प्रोत हो गया है।


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