रेलवे की लचर कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
48 घंटे में फ्लॉप हुआ ट्रेन समय बदलाव का प्रयोग, यात्री हलाकान
- कागजी टाइम-टेबल की खुली पोल
- 10 मिनट के बफर ने बिगाड़ा शेड्यूल
- नैनपुर जंक्शन पर लगातार दो दिन भटके यात्री
मंडला महावीर न्यूज 29. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर ज़ोन और नागपुर रेल मंडल का परिचालन विभाग (Operating Department) ट्रेन प्रबंधन के मामले में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। यात्रियों की सुविधा के नाम पर 22 अगस्त से ट्रेन नंबर 58823 (छिंदवाड़ा-मंडलाफोर्ट पैसेंजर) के समय में किया गया बदलाव महज 48 घंटे के भीतर ही बदहाली की भेंट चढ़ गया। रेलवे की इस अव्यावहारिक प्लानिंग और लचर कार्यप्रणाली के कारण आम जनता लगातार दो दिनों से परेशान हो रही है, जबकि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस जनसमस्या से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं।
दो दिन, दो अलग फैसले और यात्रियों की फजीहत
- पहला दिन (22 अगस्त): शनिवार को जबलपुर से लेट चली शाहडोल-नागपुर एक्सप्रेस (11202) दोपहर 12:38 बजे नैनपुर पहुंची। एक्सप्रेस के यात्रियों को कनेक्टिविटी देने के चक्कर में रेलवे ने मंडला पैसेंजर को 11:30 बजे रवाना करने के बजाय 12:02 बजे तक रोक कर रखा। इसका खामियाजा छिंदवाड़ा, सिवनी और केवलारी से आए सैकड़ों यात्रियों को भुगतना पड़ा, जो घंटों नैनपुर जंक्शन पर फंसे रहे।
- दूसरा दिन (23 अगस्त): रविवार को परिचालन विभाग ने अपनी नीति बदल दी और पैसेंजर ट्रेन को अपने निर्धारित समय 11:34 बजे रवाना कर दिया। वहीं, लेट चल रही एक्सप्रेस 11:47 बजे नैनपुर पहुंची। नतीजा यह हुआ कि एक्सप्रेस से आए दर्जनों यात्रियों की मंडला पैसेंजर छूट गई और वे नैनपुर स्टेशन पर बेबस खड़े रह गए।
मात्र 10 मिनट का बफर: कागजी टाइम-टेबल की खुली पोल
इस पूरी अव्यवस्था की मूल वजह रेलवे का कागजी टाइम-टेबल है। 11:20 बजे आने वाली एक्सप्रेस और 11:30 बजे जाने वाली पैसेंजर के बीच मात्र 10 मिनट का अंतर (बफर) रखा गया है। जबलपुर-नैनपुर रेलखंड में ट्रेनों का समय पालन (Punctuality) सुनिश्चित किए बिना ऐसा अव्यावहारिक शेड्यूल बनाना ज़ोनल और मंडलीय अधिकारियों की गंभीर अदूरदर्शिता को दर्शाता है।
जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर यात्रियों में आक्रोश
क्षेत्रीय दैनिक यात्रियों का आरोप है कि जबलपुर-नैनपुर-छिंदवाड़ा और मंडला रेलमार्ग पर परिचालन व्यवस्था पूरी तरह रामभरोसे चल रही है। जनसमस्याओं के बड़े-बड़े दावे करने वाले क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों ने रेलवे अधिकारियों के सामने समय-सारणी की इस तकनीकी खामी को उठाने की कोई ज़हमत नहीं उठाई। यात्रियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस मार्ग पर ट्रेनों की लेट-लतीफी बंद नहीं होती, तब तक ऐसे समय बदलाव का कोई फायदा नहीं होगा। रोज़-रोज़ की इस फजीहत और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से यात्रियों में भारी आक्रोश है।











