वेंटिलेटर पर 50 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था

बदहाली के आंसू रो रहा बबलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

बारिश में टपकती छत से मरीज और स्टाफ बेहाल

  • 50 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर, नए अस्पताल की उठी मांग
  • जर्जर भवन के कारण प्रसूताओं को नारायणगंज रेफर करने की मजबूरी

मंडला महावीर न्यूज 29. विकासखंड नारायणगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बबलिया इन दिनों अपनी घोर बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। बरसात के मौसम में यह पूरा अस्पताल भवन जगह-जगह से टपक रहा है। भवन की हालत इतनी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है कि छतों से पानी गिरकर सीधे कमरों में भर जाता है। हालात यह हैं कि यहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और रात में रुकने वाली नर्सों के लिए बैठने तक की सुरक्षित जगह नहीं बची है। कई बार स्टाफ को छाता लगाकर अस्पताल के भीतर बैठना पड़ता है, जिससे इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मी स्वयं इस व्यवस्था के कारण मरीज जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं।

प्रसूताओं को हो रही भारी परेशानी 

इस स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के लगभग 50 गांवों के लोग निर्भर हैं। हर महीने यहां औसतन 30 से 40 महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। लेकिन बारिश में अस्पताल के कमरों में पानी भर जाने और सुरक्षित जगह के अभाव के कारण स्टाफ को मजबूरन गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए नारायणगंज रेफर करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में इतनी दूर रेफर किए जाने से ग्रामीण महिलाओं और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खोखले साबित हो रहे सरकार के दावे 

सरकार मंचों से लगातार ढोल पीटकर यह दावा करती है कि हर गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और पहुंच मार्ग की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। लेकिन बबलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत इन सरकारी घोषणाओं की पोल खोल रही है। गांव का यह अस्पताल चीख-चीख कर बता रहा है कि विकास केवल कागजों और मंचों तक सीमित है, जबकि असलियत में ग्रामीण जन बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं।

ग्रामीणों ने की नए भवन की मांग 

क्षेत्र के ग्रामीणों और मरीजों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लंबे समय से अस्पताल के नवीनीकरण की मांग की है। अब ग्रामीणों ने एक बार फिर उग्र चेतावनी देते हुए मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बबलिया के लिए अतिशीघ्र नवीन भवन के निर्माण की स्वीकृति दी जाए। यदि जल्द ही नए भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य लाभ के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा।


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