महंगाई की मार से फीकी पड़ी पकवानों की मिठास

महंगाई की मार से फीकी पड़ी पकवानों की मिठास

गुड़-शक्कर के बढ़े दामों से ग्रामीण हुए निराश

  • मंडला में आदिवासी परंपरा का अनोखा पर्व भीमा नवा संपन्न
  • पशुधन और अन्न के प्रति दिखा सम्मान

मंडला महावीर न्यूज 29. मवई विकासखंड के ग्राम नयेगांव (नवगंवा) में आदिवासी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक अनोखा पर्व भीमा नवा पूरे हर्षोल्लास और प्राकृतिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। गोंडवाना गीतकार धन सिंह परते और उनके परिवार सहित पूरे गांव ने एकजुट होकर अपने पुरखों की इस विरासत को जीवंत किया।
जानकारी अनुसार यह पर्व किसी कैलेंडर के अनुसार नहीं, बल्कि गांव के बुजुर्गों की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया जाता है। इस दिन पूरे गांव में काम-काज बंद रहता है और लोग एक-दूसरे से मिलकर खुशियां बांटते हैं। बताया गया कि शाम के समय उपवास रखने वाली महिलाएं और बहू-बेटियां पारंपरिक वेशभूषा में सजी थाली लेकर मवेशियों का स्वागत करती हैं। गाय-बैलों को हल्दी-चावल का टीका लगाकर उन्हें उड़द के बड़े, चीला, बबरा और गुलगुले जैसे पकवान खिलाए जाते हैं।

महंगाई ने किया मिठास को फीका 

अचानक गुड़ और शक्कर के भाव बढऩे से इस बार पर्व का उत्साह थोड़ा फीका रहा। ग्रामीणों ने बताया कि महंगाई के कारण कई घरों में मिठास भरे पारंपरिक पकवान कम बन पाए।

संस्कृति और कृतज्ञता का पर्व 

समाजसेवी पीडी खैरवार ने बताया कि भीमा नवा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह पशुधन और अन्न माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम है। जब तक ऐसे पर्व जीवित हैं, तब तक मण्डला की आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकता मजबूत बनी रहेगी।


 

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