देश का पहला जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर

देश का पहला जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर

पेंड्रा रोड-अमरकंटक-मंडला-गोटेगांव रेल लाइन के FLS के लिए विधायक मार्को ने लिखा रेल मंत्री को पत्र

  • महाकौशल-छत्तीसगढ़ रेल क्रांति
  • एक ही ट्रैक से जुड़ेंगे कान्हा, पेंच और अचानकमार टाइगर रिजर्व
  • बिलासपुर-जबलपुर के बीच 100 किमी कम होगी दूरी

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती वनांचल एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रेल सुविधा की उम्मीदों को नई उड़ान मिली है। पुष्पराजगढ़ के विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर प्रस्तावित पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–गोटेगांव (श्रीधाम) रेल कॉरिडोर (406.2 किमी) के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (Final Location Survey – FLS) की तत्काल नीतिगत स्वीकृति और बजट आवंटन की मांग की है।

इस परियोजना को देश के पहले ‘जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर’ के रूप में देखा जा रहा है।

1944 की ऐतिहासिक परिकल्पना, 2015 के सर्वे का आधार

विधायक मार्को ने रेल मंत्री को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि 1944 में कल्पित इस ऐतिहासिक रेल लाइन का प्रारंभिक टोह सर्वेक्षण (Reconnaissance Survey – RECT) वर्ष 2015 में पूर्ण हो चुका है। यह 406.2 किमी लंबा रेल मार्ग दो राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक संपर्क स्थापित करेगा। इसके बनने से बिलासपुर और जबलपुर के बीच की वर्तमान यात्रा दूरी में लगभग 100 किलोमीटर तक की भारी कमी आएगी।

SECR और नागपुर मंडल का सकारात्मक रुख

विधायक ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर द्वारा 09 जुलाई 2026 को जारी पत्र का हवाला देते हुए बताया कि क्षेत्रीय स्तर पर बिलासपुर मुख्यालय और नागपुर मंडल, दोनों ने ही इस परियोजना की सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता और महत्व पर अपनी सहमति जता दी है। रेलवे प्रशासन के इस सकारात्मक रुख के बाद अब केवल रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से FLS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

फुन्देलाल सिंह मार्को, पुष्पराजगढ़ विधायक

देश का पहला ‘जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर’

प्रस्तावित नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक केंद्रों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेगा:

  • धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र: नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक और झोलेश्वर धाम तक देशभर के श्रद्धालुओं की पहुंच आसान होगी।
  • वाइल्डलाइफ कनेक्टिविटी: यह मार्ग कान्हा नेशनल पार्क, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, अचानकमार टाइगर रिजर्व और घुघुआ फॉसिल पार्क को जोड़ते हुए देश का अनूठा “जंगल रेल कॉरिडोर” बनेगा।

रेल मंत्रालय से की गई प्रमुख मांगें

विधायक मार्को ने अपने पत्र में रेल मंत्रालय से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. FLS स्वीकृति: 406.2 किमी लंबी पेंड्रा रोड-अमरकंटक-डिंडोरी-मंडला-गोटेगांव रेल परियोजना के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) के तत्काल आदेश जारी किए जाएं।
  2. DPR व बजट आवंटन: FLS के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।
  3. क्षेत्रीय विकास: आदिवासी और वनांचल क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं स्थानीय रोजगार को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

महाकौशल क्षेत्र में उत्साह की लहर

स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने बताया कि विधायक द्वारा सीधे रेल मंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद पूरे महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व आम जनता में भारी उत्साह है। यदि इस परियोजना के FLS को मंजूरी मिलती है, तो यह मध्य भारत के रेल नेटवर्क और पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।


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