मेधावियों को निखारने की 10 वर्षीय परंपरा कायम

मेधावियों को निखारने की 10 वर्षीय परंपरा कायम

10वीं की टॉपर साधना साहू को मिला 5 हजार का नकद पुरस्कार

  • शिक्षा को बढ़ावा: आदिवासी अंचल की प्रतिभाओं का सम्मान
  • उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छात्रा साधना को मिला नकद प्रोत्साहन

मंडला महावीर न्यूज 29.  ग्रामीण और आदिवासी अंचल में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने और प्रतिभावान विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने के लिए मवई क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों से एक अनूठी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, इस वर्ष 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के पावन अवसर पर पूर्व जनपद सदस्य व ग्राम पंचायत परसाटोला के वर्तमान सरपंच श्री अशोक बघेल तथा वर्तमान जनपद सदस्य श्रीमती दीपा अशोक बघेल ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्रा को 5,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।

कठिन परिस्थितियों में साधना ने लहराया परचम

जानकारी अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में एकीकृत शासकीय हाई स्कूल धनगांव में आयोजित कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्रा साधना साहू ने 87 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। साधना मूल रूप से जनपद पंचायत बिछिया के ग्राम पंचायत लपटी (ग्राम भौंदा) की निवासी हैं। उनके पिता श्री जागेश्वर साहू एवं माता श्रीमती सोनकली साहू हैं।

साधना ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय धनगांव में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी इस शानदार सफलता ने न केवल उनके माता-पिता, बल्कि पूरे विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं

स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में श्री अशोक बघेल एवं श्रीमती दीपा अशोक बघेल ने साधना साहू को मंच पर नकद राशि भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो बस उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की। लगन और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

एक दशक से जारी है यह सराहनीय पहल

क्षेत्र में पिछले लगभग 10 वर्षों से लगातार प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने का यह सिलसिला जारी है। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य महज पुरस्कार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, कड़ी मेहनत और शिक्षा के प्रति गहरी रुचि पैदा करना है। आर्थिक प्रोत्साहन देकर विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र के अन्य बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बनेगी।


रिपोर्टर- संदीप श्रीवास, मवई


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