रेड ब्रिज कॉन्वेंट स्कूल की मनमानी, जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य
दलदल भरे रास्तों से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
- बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव
- सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां
- एक ही दुकान से महंगी किताबें खरीदने का दबाव
मंडला महावीर न्यूज 29. नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर सामने आने लगी है। क्षेत्र के रेड ब्रिज कॉन्वेंट स्कूल पर शासन के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी करने और अभिभावकों का आर्थिक शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
जानकारी अनुसार शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूलों में पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें पढ़ाई जाएं, जिसमें कक्षा 4 की किताब मात्र 289 रूपए की है, लेकिन स्कूल प्रबंधन द्वारा 1400 से 1500 रूपए तक की निजी प्रकाशकों की किताबें चलाई जा रही हैं। अभिभावकों को स्कूल ड्रेस, टाई, बेल्ट और कॉपी-किताबें एक ही चुनिंदा दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इसके अलावा हर साल प्रकाशक बदल दिए जाते हैं, जिससे एक से अधिक बच्चों वाले परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सुविधाओं का अभाव और खस्ताहाल पहुंच मार्ग
स्कूल एक खेत के बीच में स्थित है और वहां तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है। इसी जोखिम भरे रास्ते से छोटे बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं। इसके अलावा स्कूल परिसर में खेल के मैदान और पीने के साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी भारी अभाव है।
अधिकारियों की अनदेखी
अभिभावकों का कहना है कि बीईओ और बीआरसी से शिकायत के बाद जांच में कई अनियमितताएं पाई गई थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नतीजतन स्कूल प्रिंसिपल की मनमानी बदस्तूर जारी है। परेशान अभिभावकों ने अब उच्चाधिकारियों से अपील की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।










