परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का महाआंदोलन

सड़क से संसद तक संग्राम

परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का महाआंदोलन

  • संसद मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों में हिंसक झड़प
  • विपक्ष ने मांगा शिक्षा और गृह मंत्री का इस्तीफा

मंडला महावीर न्यूज 29. भारत में शिक्षा और सार्वजनिक भर्ती परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का असंतोष अब एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले एक महीने से हजारों युवा सड़कों पर उतरकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और प्रभाव

  • पिछले एक दशक में नीट-यूजी, यूजीसी-नेट सहित राज्य और केंद्रीय स्तर के 90 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
  • बार-बार परीक्षाएं रद्द होने और नियुक्तियों में देरी से युवाओं के सामने रोजगार का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

संसद मार्च और पुलिस के साथ टकराव

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन को और गति मिली। 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद मार्च’ के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी टकराव हुआ।

  • पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए।
  • प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बैरिकेडिंग में करंट, पैलेट गन और कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है, जिसकी स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।

छावनी में तब्दील हुई राजधानी

हालात को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर 3,000 अतिरिक्त सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक का इलाका पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है और सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।

विपक्ष का समर्थन और मानवाधिकार संगठनों की चिंता

इस छात्र आंदोलन को भारी राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिल रहा है। सिख समाज और आम नागरिक जहां छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं, वहीं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे, शरद पवार और अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। संसद में भी विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए बल प्रयोग पर चिंता जताई है।

आगे की राह

आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में निष्पक्षता स्थापित करने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल पुलिस बल से नहीं, बल्कि सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक संवाद, जवाबदेही और संस्थागत सुधारों के माध्यम से ही संभव है।

(रिपोर्ट: राज कुमार सिन्हा, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के लेख पर आधारित)


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