साइबर फ्रॉड-5 रूपए के ऑनलाइन एडमिशन के चक्कर में उड़े एक लाख

साइबर फ्रॉड-5 रूपए के ऑनलाइन एडमिशन के चक्कर में उड़े एक लाख

मार्बल सिटी हॉस्पिटल के नाम पर साइबर ठगी से हड़कंप

  • मार्बल सिटी हॉस्पिटल का लैंडलाइन हैक होने का दावा
  • संदिग्ध लिंक से 5 रूपए का भुगतान करते ही खाते से पार हुए 1 लाख रूपए

मंडला महावीर न्यूज 29. जबलपुर स्थित प्रतिष्ठित मार्बल सिटी हॉस्पिटल के नाम पर एक बड़ी ऑनलाइन ठगी का मामला प्रकाश में आया है। अस्पताल में मरीज के एडमिशन के नाम पर मात्र 5 रूपए का ऑनलाइन भुगतान करने के झांसे में आकर एक व्यक्ति के बैंक खाते से 1 लाख की राशि उड़ गई। इस घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में भारी चिंता और हड़कंप का माहौल है।

ऐसे दिया ठगी को अंजाम 

साइबर फ्रॉड से पीडि़त ने बताया कि उसने मरीज के इलाज संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मार्बल सिटी हॉस्पिटल के आधिकारिक लैंडलाइन नंबर पर कॉल किया था। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और पहले ऑनलाइन एडमिशन कराने की प्रक्रिया समझाई। इसके बाद ठग ने एक निजी मोबाइल नंबर से पीडि़त को एक संदिग्ध लिंक भेजा और कहा कि एडमिशन के लिए केवल 5 रूपए का औपचारिक शुल्क जमा करना होगा। जैसे ही पीडि़त ने उस लिंक पर अपनी जानकारी दर्ज कर 5 रूपए का भुगतान किया, पलक झपकते ही उसके खाते से एक लाख रूपए की बड़ी रकम कट गई।

प्रबंधन का हैकिंग का दावा और उठते सवाल 

ठगी का अहसास होने पर जब पीडि़त ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया, तो प्रबंधन ने दावा किया कि उनका लैंडलाइन नंबर हैक कर लिया गया है और उसी के जरिए साइबर ठग मरीजों को फर्जी लिंक भेज रहे हैं। हालांकि अस्पताल के इस दावे पर तकनीकी जानकारों ने सवालिया निशान खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी लैंडलाइन नंबर का इस तरह से दुरुपयोग करना या उसे हैक करना आसान नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नंबर हैक हुआ है, तो उसी नंबर पर कॉल करने पर अभी भी अस्पताल में ही कॉल कैसे रिसीव हो रही है? लोगों का मानना है कि इस मामले में तकनीकी पहलुओं की गहन जांच होना बेहद आवश्यक है जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

शिकायत दर्ज और निष्पक्ष जांच की मांग 

इस गंभीर मामले की शिकायत जबलपुर के लाडगंज पुलिस थाने तथा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज करा दी गई है। स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि कॉल रिकॉर्ड, लिंक भेजने वाले मोबाइल नंबर और अन्य सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाए। यदि इसमें अस्पताल के किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों की सतर्क रहने की अपील 

इस घटना के बाद साइबर विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अस्पताल, संस्था या कस्टमर केयर के नाम पर भेजे गए लिंक पर बिना पुख्ता सत्यापन के कोई जानकारी न भरें। किसी भी प्रकार के ऑनलाइन भुगतान से पहले संबंधित संस्था से सीधे (आधिकारिक वेबसाइट या काउंटर पर) पुष्टि अवश्य करें। साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने की स्थिति में बिना देर किए तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।


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