मंडला में जनशिक्षा केंद्र स्तरीय समावेशित शिक्षा प्रशिक्षण का सफल आयोजन
288 शिक्षकों ने सीखा समावेशी शिक्षण का हुनर
- ‘प्रशस्त ऐप’ से होगी दिव्यांग बच्चों की पहचान
- मंडला में शिक्षकों को मिला ब्रेल लिपि
- सांकेतिक भाषा व विशेष शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण
- जनशिक्षा केंद्र स्तरीय समावेशित शिक्षा प्रशिक्षण संपन्न
- शिक्षकों को मिला ‘प्रशस्त ऐप’ और विशेष शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण
मंडला महावीर न्यूज 29. राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के निर्देशानुसार तथा जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में समावेशित शिक्षा के तहत शिक्षकों के क्षमतावर्धन हेतु जनशिक्षा केंद्र स्तरीय समावेशित शिक्षा प्रशिक्षण का गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ। इस विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामान्य शालाओं में अध्ययनरत दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण, अनुकूल तथा सहज शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
288 प्रतिभागियों ने ली सक्रिय सहभागिता
प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी देते हुए विकासखंड एमआरसी संदीप कुमार सोनी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विकासखंड की प्राथमिक, माध्यमिक एवं एकीकृत शालाओं के कुल 270 प्रभारी शिक्षकों तथा 18 जनशिक्षकों सहित कुल 288 प्रतिभागियों ने सहभागिता दर्ज की। 5 दिवसीय इस गहन प्रशिक्षण शिविर में शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की आधुनिक अवधारणाओं और व्यावहारिक कौशलों से अवगत कराया गया।
प्रशस्त ऐप और 21 प्रकार की दिव्यांगताओं पर विशेष ध्यान
प्रशिक्षण का एक मुख्य आकर्षण भारत सरकार द्वारा विकसित ‘प्रशस्त ऐप’ (PRASHAST App) पर आधारित सत्र रहा। 270 प्रभारी शिक्षकों को ऐप के संचालन, बच्चों की डिजिटल मैपिंग और स्क्रीनिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके माध्यम से विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त विद्यार्थियों की प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग कर दिव्यांगता का त्वरित व सटीक चिन्हांकन संभव हो सकेगा।
एमआरसी प्रशांत वैध ने 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लक्षण, पहचान के तरीकों और दिव्यांग बच्चों के चिन्हांकन की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार शिक्षक अपने स्तर पर शुरुआती संकेतों को पहचान कर बच्चों को सही दिशा और सहयोग दे सकते हैं।
ब्रेल लिपि, सांकेतिक भाषा और आईईपी का व्यावहारिक ज्ञान
प्रशिक्षण सत्रों के दौरान प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षकों को ब्रेल लिपि के बुनियादी उपयोग, मूक-बधिर बच्चों के लिए व्यावहारिक सांकेतिक भाषा (Sign Language) तथा अधिगम स्तर के सटीक मूल्यांकन की विधियां सिखाई गईं। इसके अलावा, प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ‘व्यक्तिगत शैक्षिक कार्यक्रम’ (IEP – Individualized Education Program) के निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन पर विशेष व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। शिक्षकों को प्रेरित किया गया कि वे दिव्यांग बच्चों में आत्महीनता की भावना समाप्त कर उनमें आत्मविश्वास जगाएं और उन्हें विद्यालय की हर गतिविधि, खेलकूद व प्रतियोगिता में समान अवसर प्रदान करें।
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन
- जिला परियोजना समन्वयक (DPC) अशोक शुक्ल के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के समावेशित शिक्षा प्रभारी एवं सहायक परियोजना समन्वयक (APC) के.के. उपाध्याय ने संबोधित करते हुए कहा, “समावेशित शिक्षा केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक बच्चे को समानता का अधिकार देने का संकल्प है। दिव्यांग बच्चों में अपार प्रतिभा छिपी होती है, बस आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षक संवेदनशीलता और धैर्य के साथ उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करें।”
- नोडल अधिकारी एवं बीआरसी अनादि वर्मा ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को उनकी शारीरिक या मानसिक स्थिति के अनुकूल शिक्षण वातावरण देना हमारी नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी है। इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का सीधा लाभ कक्षाओं तक पहुँचेगा और समावेशी शिक्षा का तंत्र और अधिक मजबूत होगा।
- डाइट (DIET) प्राचार्य डी.सी. उइके ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि समावेशित शिक्षा का मूल ध्येय दिव्यांग विद्यार्थियों में व्याप्त झिझक व हीनभावना को समाप्त करना है। जब प्रशिक्षित शिक्षक विद्यालय में संवेदनशीलता का माहौल बनाएंगे, तब बच्चों का सर्वांगीण—शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक—विकास संभव हो सकेगा।
- विकासखंड एमआरसी संदीप कुमार सोनी ने प्रशिक्षण के समापन पर कहा कि दिव्यांग बच्चे किसी भी मामले में अन्य सामान्य बच्चों से कम नहीं हैं। बस उन्हें सही अवसर और तकनीक की जरूरत होती है। इस 5 दिवसीय प्रशिक्षण ने शिक्षकों को ब्रेल, सांकेतिक भाषा और नवीन तकनीकों से लैस किया है।
ऑनलाइन पोर्टल व अपार आईडी संबंधी समस्याओं का हुआ निराकरण
प्रशिक्षण के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रशासनिक व तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। विकासखंड मंडला की एमआईएस समन्वयक व ऑपरेटर स्वाती सोनवानी ने वर्तमान में संचालित विभिन्न ऑनलाइन प्रक्रियाओं—जैसे अपार आईडी (APAAR ID) निर्माण, नए नामांकन, यू-डाइस (U-DISE+) पोर्टल पर प्रविष्टियों तथा डेटा अपडेट में शिक्षकों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया। उन्होंने तकनीकी प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
समापन अवसर पर उपस्थित समस्त अधिकारियों, बीआरसी, एमआरसी एवं जनशिक्षकों ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण के बाद जिले के सभी विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील और समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।











