वेतन विसंगति और जबरन कटौती के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदेश व्यापी मोर्चा
रुकी हुई प्रोत्साहन राशि, एरियर और गैर-विभागीय कार्यों के दबाव को लेकर सौंपा ज्ञापन
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। मप्र आशा, आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर सोमवार को पूरे प्रदेश में व्यापक प्रदर्शन किया गया। इस संबंध में संघ द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मिशन संचालक और जिला कलेक्टर के नाम एक 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया है, जिसमें वेतन विसंगतियों, वेतन कटौतियों और प्रशासनिक उत्पीडऩ को लेकर कड़ा विरोध जताया गया है।
श्रमिक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को रोकने और सरकार के स्वास्थ्य अभियानों को 24-24 घंटे सक्रिय रहकर जमीन पर उतारने वाली आशा कार्यकर्ताओं को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं को केवल 6 हजार रूपए मासिक मानदेय मिल रहा है, जबकि अन्य राज्यों में यह राशि 10 हजार रूपए से अधिक है। बावजूद इसके विभाग द्वारा कई महीनों तक वेतन रोका जाता है और बाद में बजट का हवाला देकर मनमर्जी से कटौती कर दी जाती है। इतना ही नहीं साप्ताहिक अवकाश रविवार और त्योहारों की छुट्टियों के दिनों का भी वेतन काटा जा रहा है, जिसे संघ ने पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अमानवीय बताया है।
वेतन वृद्धि रोकने और आयुष्मान कार्ड के नाम पर किया जा रहा प्रताडि़त
ज्ञापन में स्पष्ट कहां गया है कि वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा आशा और पर्यवेक्षकों के लिए एक हजार की वार्षिक वेतन वृद्धि की नोट शीट जारी की गई थी, लेकिन आंगनबाड़ी और संविदा कर्मियों को लाभ दिए जाने के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं की इस वैध वृद्धि को जबरन रोक कर रखा गया है। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि आयुष्मान कार्ड बनाने जैसे गैर-विभागीय कार्यों को करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं पर सेवा समाप्ति का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। कंप्यूटर व इंटरनेट की व्यवस्था न होने के कारण इन अल्पवेतन भोगी कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से पैसे खर्च कर आयुष्मान कार्ड बनवाने पड़ रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।
श्रमिक संघ की प्रमुख 16 सूत्रीय मांगें
ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक बिना किसी कटौती के वेतन का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। वेतन भुगतान में पारदर्शिता के लिए बकाए और भुगतान की जानकारी दर्ज वेतन पर्ची प्रदान की जाए। वर्ष 2024 से रुकी हुई एक हजार की वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर सहित भुगतान हो। राज्य शासन की ओर से समय पर वेतन जारी करने हेतु पर्याप्त बजट की व्यवस्था की जाए। आयुष्मान कार्ड, चुनावी ड्यूटी आदि जैसे गैर-विभागीय कार्य बिना विधिवत आदेश और अतिरिक्त भत्ते के न कराए जाएं। बिना किसी निष्पक्ष जांच के दुर्भावनापूर्ण तरीके से वेतन काटने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। आशा कार्यकर्ताओं को 26 हजार और पर्यवेक्षकों को 35 हजार न्यूनतम वेतन व यात्रा भत्ता दिया जाए। तब तक अंतरिम रूप से प्रतिमाह 10 हजार का भुगतान हो। 29 जुलाई 2023 की घोषणा के अनुसार पर्यवेक्षकों के लिए 15 हजार मासिक वेतन के साथ 3 हजार का यात्रा भत्ता पृथक से बहाल किया जाए।
शासकीय चिकित्सालयों के निजीकरण करने के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। एएनएम और सीएचओ की तर्ज पर आशा पर्यवेक्षकों को भी बेहतर इंसेंटिव प्रदान किया जाए। जिन गांवों में आशा कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं, वहां तत्काल नियुक्ति की जाए जिससे अन्य कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त काम का बोझ न पड़े। विभागीय त्रुटियों को कार्यकर्ताओं पर थोपकर बिना पक्ष सुने या बिना स्पष्ट जांच के नौकरी से निकालना बंद किया जाए। इसके साथ ही अन्य मांगों को जल्द पूरा किया जाए। श्रमिक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इन न्यायोचित और जमीनी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निराकरण नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग की होगी।










