महज औपचारिकता बनकर रह गया शिक्षक समस्या निवारण शिविर
लगातार तीन बार से नदारद रहे बीईओ
- कलेक्टर की अनूठी पहल पर विभागीय अधिकारियों ने फेरा पानी
- तीन शिविरों में आए 100 आवेदन, निराकरण का अता-पता नहीं
मंडला महावीर न्यूज 29. समाज को दिशा देने वाला और बच्चों के भविष्य को संवारने वाला शिक्षक आज खुद अपनी जायज समस्याओं को लेकर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। विकासखंड नैनपुर के शिक्षक लंबे समय से नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता, पेंशन और टीईटी परीक्षा जैसी राज्य स्तरीय समस्याओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर की विभागीय विसंगतियों से जूझ रहे हैं। जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले तो होते रहे, लेकिन शिक्षकों की सुध लेने वाला कोई नहीं था।
कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे का नवाचार पड़ा सुस्त
शिक्षकों की इन पुरानी और जायज मांगों को देखते हुए जिले के नवागत कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने एक सराहनीय पहल की थी। उनके निर्देशानुसार जून माह के प्रत्येक शनिवार को विकासखंड स्तर पर शिक्षक समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन दुर्भाग्यवश, जमीनी स्तर पर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण कलेक्टर की यह बेहतरीन योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। इसका मुख्य कारण विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार न करना और खुद शिविर से दूरी बनाए रखना है।
जिम्मेदार नदारद, शिविर में सिर्फ आवेदन का खेल
शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी नैनपुर ने औपचारिकता पूरी करने के लिए तीन प्रभारी प्राचार्यों, बाबूओं और भृत्यों की एक टीम तो तैनात कर दी, जो हर शनिवार सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक केवल आवेदन जमा कर रही है। परंतु खुद बीईओ की अनुपस्थिति के कारण इन आवेदनों पर कब और कैसे कार्रवाई होगी, यह बताने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं रहता। पीडि़त शिक्षकों का कहना है कि कागजों और ज्ञापनों का यह खेल वर्षों से चल रहा है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। उल्टे छोटे-छोटे कामों के लिए शिक्षकों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ता है।
तीन शिविरों में आए 100 आवेदन, कार्रवाई शून्य
लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीईओ कार्यालय नैनपुर में आयोजित शिविर के पहले शनिवार को 12, दूसरे शनिवार को 18 और तीसरे शनिवार को लगभग 70 शिक्षकों ने अपनी समस्याओं के आवेदन सौंपे। अब तक कुल 100 के करीब आवेदन जमा हो चुके हैं, लेकिन इन पर विभाग ने क्या कदम उठाया, इसकी कोई जानकारी शिक्षकों को नहीं दी गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर के इस नवाचार को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनकी कमियां उच्च स्तर तक न पहुंच सकें।
संयुक्त मोर्चा ने उठाई आवाज, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की मांग
इस अव्यवस्था को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा नैनपुर ने एक विज्ञप्ति जारी की है। मोर्चा ने इस संवेदनशील पहल के लिए कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे का आभार तो जताया, लेकिन साथ ही एक मांग पत्र भी सौंपा है। बताया गया कि आगामी शनिवार को जून महीने का अंतिम शिविर आयोजित होना है। हमारी मांग है कि कलेक्टर स्वयं संज्ञान लेकर बीईओ को शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दें। इसके साथ ही आवेदनों के निराकरण की समय-सीमा और जिम्मेदारी तय की जाए ताकि शिक्षकों को स्कूल छोड़कर दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके अलावा बीईओ कार्यालय में ट्रेजरी और अन्य छोटे कामों के बदले चल रही रिश्वत की प्रवृत्ति पर भी तुरंत अंकुश लगाया जाए।











