हौसलों की उड़ान
शिक्षिका बनना चाहती है द्रोपती धुर्वे, टेवटा उठाएंगा आगे की पढ़ाई का खर्च
- गर्ल्स कॉलेज मंडला में होगा एडमिशन, हॉस्टल की भी तैयारी
- दोनों हाथों से दिव्यांग द्रोपती ने पैर से लिखकर 12वीं में आई प्रथम
मंडला महावीर न्यूज 29. परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता कदम चूमती है। इसे सच कर दिखाया है शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भीमडोंगरी की छात्रा द्रोपती धुर्वे ने। दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद द्रोपती ने इस वर्ष कक्षा 12वीं की परीक्षा अपने पैर से लिखकर 65 प्रतिशत अंकों प्राप्त कर प्रथम श्रेणी के साथ उत्तीर्ण की है। इससे पहले वह 10वीं में भी पैर से लिखकर प्रथम श्रेणी में पास होकर चर्चा में आई थीं। द्रोपती के इस जज्बे को सलाम करते हुए ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन उसकी आगे की पढ़ाई का पूरा जिम्मा उठाने के लिए आगे आया है।
कृत्रिम हाथ लगाने के हुए थे बड़े प्रयास
एसोसिएशन द्वारा द्रोपती को कृत्रिम हाथ लगवाने के लिए नागपुर, दिल्ली और मुंबई तक ले जाया गया था। इस कार्य के लिए संस्था 5-6 लाख रुपये तक खर्च करने को तैयार थी। हालांकि कंधे का समुचित विकास न होने के कारण कामकाजी (मायो-इलेक्ट्रिक) कृत्रिम हाथ नहीं लग सका। दिल्ली में उसका कॉस्मेटिक हैंड बनाया गया था, लेकिन वह उसका नियमित उपयोग नहीं कर पाई। इसके अलावा मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल के प्रसिद्ध डॉक्टर डॉ. मुकुंद थाटे ने द्रोपती के दाहिने हाथ की सर्जरी की सलाह दी थी, लेकिन परिवार की सहमति न मिलने के कारण वह भी संभव नहीं हो सका। इन परिस्थितियों के बाद एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि द्रोपती को पैर से लिखकर ही आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उसकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाया जाए।
टीचर्स एसोसिएशन ने घर पहुंचकर बढ़ाया हौसला
शनिवार को ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर एवं जिला उपाध्यक्ष प्रदीप पटेल ने द्रोपती धुर्वे के घर पहुंचकर उससे और उसके माता-पिता से मुलाकात की। पदाधिकारियों ने द्रोपती को उसकी 12वीं की अंकसूची एवं ट्रांसफर सर्टिफिकेट सौंपते हुए उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
द्रोपती का सपना, मुझे शिक्षक बनना है
द्रोपती भविष्य में एक शिक्षिका बनकर समाज को शिक्षित करना चाहती है। एसोसिएशन ने उसके इस सपने को पूरा करने के लिए डीएड और बीए, बीएड कोर्स में प्रवेश की संभावनाएं तलाशीं। डीके सिंगौर ने बताया कि डीएड, बीएड करने में द्रोपती के आगे उसकी आयु सीमा आड़े आ रही है। अभी द्रोपती की उम्र 17 वर्ष पूरी नहीं होने के कारण डीएड में प्रवेश फिलहाल संभव नहीं है।
गर्ल्स कॉलेज मंडला में होगा दाखिला
बीए, बीएड पाठ्यक्रम का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण उसमें भी अभी दाखिला नहीं हो पा रहा है। फिलहाल एसोसिएशन ने द्रोपती का बीए पाठ्यक्रम के लिए पंजीयन कराया है और उसका एडमिशन गर्ल्स कॉलेज, मंडला में कराया जा रहा है। द्रोपती को बेहतर शैक्षणिक माहौल और मार्गदर्शन मिल सके, इसके लिए विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर उसे शासकीय छात्रावास में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इनका कहना है
द्रोपती जैसी संघर्षशील और प्रतिभाशाली छात्रा को यदि उचित अवसर और सहयोग मिले, तो वह निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगी। वह भविष्य में अपने माता-पिता का सहारा बनने के साथ पूरे समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी।
डीके सिंगौर, प्रदेश अध्यक्ष, ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन










