बोर्ड पैटर्न पर परखा गया आशा कार्यकर्ताओं का ज्ञान

बोर्ड पैटर्न पर परखा गया आशा कार्यकर्ताओं का ज्ञान

स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की परीक्षा

  • एनआईओएस के माध्यम से तीन चरणों में हो रहा प्रमाणीकरण
  • सफल होने पर मिलगा सर्टिफाइड आशा का दर्जा
  • आशा और पर्यवेक्षकों की दक्षता परखने ली लिखित परीक्षा
  • पुरानी यादें ताजा, सालों बाद बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा देने पहुंचीं आशा कार्यकर्ता
  • 25 मई से शुरू होगा प्रायोगिक परीक्षा का अंतिम तीसरा चरण

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के ग्रामीण और शहरी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी कमान संभालने वाली आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के कौशल को निखारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान दिल्ली के माध्यम से जिले की चयनित आशा कार्यकर्ताओं के ज्ञान और कार्यक्षमता को परखने के लिए तीन चरणों वाली प्रमाणन परीक्षा आयोजित की जा रही है। हाल ही में इस प्रक्रिया के दूसरे चरण के तहत उत्कृष्ट विद्यालय मंडला में लिखित परीक्षा संपन्न हुई।

जानकारी अनुसार जिले में कार्यरत करीब 1271 आशाओं में से चयन प्रक्रिया के आधार पर 152 आशाओं को इस विशिष्ट परीक्षा के लिए नामांकित किया गया था। उत्कृष्ट विद्यालय की प्राचार्य कल्पना नामदेव की निगरानी में आयोजित इस परीक्षा में 149 आशा कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक शामिल हुए, जबकि 3 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा को पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर संचालित किया गया। परीक्षा केंद्र में मोबाइल और अन्य सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध रही और परीक्षार्थियों ने निर्धारित रोल नंबर के अनुसार बैठकर डेढ़ घंटे की लिखित परीक्षा दी।

आठ ब्लाक और एक अर्बन से शामिल हुई आशा 

इस परीक्षा में जिले के आठ विकासखंडों और एक शहरी क्षेत्र की आशाओं ने भाग लिया। लिखित परीक्षा में विकासखंड मंडला के बम्हनी से 21, मोहगांव से 12, नारायणगंज से 20, बिछिया से 08, नैनपुर से 22, बीजाडांडी से 19, निवास से 13, घुघरी से 14 और मंडला अर्बन से 20 समेत चयनित 149 आशा वर्कर और पर्यवेक्षकों ने दूसरे चरण में लिखित परीक्षा दी। आयोजित परीक्षा को लेकर ये काफी उत्साहित दिख रही थी। इस परीक्षा में पास होने के बाद प्रायोगिक परीक्षा ली जाएगी, जिसके बाद आशा प्रमाणित हो जाएगी।

पुरानी यादें हुईं ताजा, स्कूल के दिन याद आए 

वर्षों बाद हाथ में पेन और पेपर लेकर परीक्षा केंद्र पहुंची आशा कार्यकर्ताओं के लिए यह अनुभव भावुक करने वाला रहा। कई कार्यकर्ताओं ने साझा किया कि बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा देने और रोल नंबर तलाशने की इस प्रक्रिया ने उन्हें उनके स्कूल के दिनों की याद दिला दी। केंद्रों पर की गई कड़ी व्यवस्थाओं ने उन्हें अपनी जिम्मेदारी और इस परीक्षा की गंभीरता का अहसास कराया। परीक्षा देने पहुंची आशा कार्यकर्ताओं ने केंद्र पर मोबाइल और अन्य सामग्री को बाहर रखवाने जैसी सख्त व्यवस्थाओं के बीच, परीक्षार्थियों ने पूरी गंभीरता के साथ पर्चा हल किया। आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस परीक्षा से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की तकनीकी बारीकियों को दोबारा सीखने का अवसर मिला है।

प्रमाणीकरण के लिए तीन चरणों की चुनौती 

बीसीएम राहुल चंद्रौल ने बताया कि यह परीक्षा कुल तीन चरणों में विभाजित की गई। लिखित परीक्षा के लिए आशा कार्यकर्ताओं में से कठोर मानकों के आधार पर 149 आशाओं व पर्यवेक्षकों का चयन इस विशेष परीक्षा के लिए किया गया था। प्रमाणीकरण के लिए परीक्षा को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। जिसमें प्रथम चरण में ऑनलाइन माध्यम से आंतरिक मूल्यांकन किया जाता है। द्वितीय चरण में निर्धारित केंद्र पर बोर्ड पैटर्न पर आधारित लिखित परीक्षा ली जाती है। तृतीय चरण में फील्ड वर्क और कौशल पर आधारित प्रायोगिक परीक्षा ली जाती है। फिलहाल आयोजित दूसरे चरण की लिखित परीक्षा में कुल 152 में से 149 आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं, जबकि 3 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहीं।

बढ़ेगी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता 

डीसीएम हिमांशु सिंगौर ने बताया कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी हैं। आशा कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर शिशु स्वास्थ्य से लेकर बुजुर्गों की देखभाल तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, बल्कि उनके चिकित्सा ज्ञान को अपडेट करना और आत्मविश्वास बढ़ाना है जिससे वे शिशु स्वास्थ्य से लेकर बुजुर्गों की देखभाल तक के कार्यों को और अधिक सटीकता से कर सकें। उन्होंने बताया कि सभी प्रतिभागी काफी उत्साहित हैं और परिणाम आने के बाद उनकी काबिलियत को एक नई पहचान मिलेगी।

अंतिम बाधा प्रायोगिक परीक्षा 

ब्लॉक कम्युनिटी मॉनिटर राहुल चंद्रौल ने आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि लिखित परीक्षा के बाद अब अंतिम बाधा प्रायोगिक परीक्षा है। यह प्रायोगिक परीक्षा आगामी 25 से 27 मई के बीच आयोजित की जाएगी। तीनों चरण आंतरिक, लिखित और प्रायोगिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाली आशा कार्यकर्ताओं को सर्टिफाइड घोषित किया जाएगा, जिससे उनकी व्यावसायिक क्षमता को नई पहचान मिलेगी।


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