शीतला माता की पूजा के साथ मनाया परंपरागत थदड़ी पर्व

शीतला माता की पूजा के साथ मनाया परंपरागत थदड़ी पर्व

एक दिन पहले तैयार किया अगले दिन का भोजन

  • थदड़ी पर सिंधी घरों में नहीं जले चूल्हे
  • एक दिन पहले बने व्यंजनों से ग्रहण किया ठंडा भोजन
  • चूल्हे को दिया विश्राम, सिंधी समाज ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में गुरुवार को सिंधी समाज की महिलाओं ने पूर्ण आस्था और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ अपना प्रमुख थदड़ी पर्व मनाया। इस अवसर पर शीतला माता की विशेष पूजा की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार थदड़ी के दिन चूल्हे को एक दिन का विश्राम दिया जाता है, जिसके चलते अधिकांश सिंधी परिवारों के घरों में चूल्हे नहीं जले और सभी ने ठंडा भोजन ग्रहण किया।

एक रात पहले तैयार हुए पारंपरिक व्यंजन 

पर्व की तैयारियों के तहत सिंधी परिवारों ने बुधवार रात को ही अगले दिन के लिए भोजन तैयार कर लिया था। इसमें समाज के पारंपरिक व्यंजन जैसे कोकी, डोढा, पुड़ी, मीठी रोटी, दाल की रोटी, भजिया, भिंडी, दहीबड़ा, थेपले, चने और अंकुरित सलाद बनाए गए। भोजन पकाने के बाद रात में ही चूल्हे को जल सिंचित करके विश्राम दे दिया गया।

पुरोहित के घर हुई सामूहिक पूजा 

गुरुवार सुबह सिंधी समाज की महिलाएं सामाजिक पुरोहित साक्षी रानूनाथ शर्मा के निवास पर एकत्रित हुईं और शीतला माता की विधि-विधान से सामूहिक पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर महिलाओं ने बताया कि थदड़ी पर्व सिंधी समाज की एक अत्यंत प्राचीन परंपरा है। यह विरासत उन्हें अपने घर के बुजुर्गों से मिली है, जिसे नई पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है।


रिपोर्टर- रितेश पमनानी


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