हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय

सावन का पहला सोमवार

हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे मंडला के शिवालय

  • माहिष्मती घाट पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
  • 31 हजार बेलपत्रों से हुआ भगवान शिव का महारुद्राभिषेक
  • प्राचीन द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में 30 वर्षों से जारी है विशेष श्रृंगार की अखंड परंपरा

मंडला महावीर न्यूज 29. भगवान शिव का प्रिय मास सावन शुरू हो चुका है। इस मास में आने वाला हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। सुबह से ही भक्त मंदिरों, नर्मदा घाट में बने शिवालयों में पहुंचे। भक्तों ने भगवान शंकर की पूजा अर्चना की और भोलेनाथ का फूलों, बेल पत्र से श्रृंगार किया। पवित्र सावन मास के प्रथम सोमवार को मंडला जिले के सभी शिवालयों में अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। पूरे नगर का आध्यात्मिक वातावरण हर-हर महादेव और बम-बम भोले के निरंतर जयघोष से शिवमय हो गया। सावन के इस पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है, और इसी अटूट आस्था के चलते हजारों श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान आशुतोष से परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और चहुंमुखी मंगल की कामना की।जिले के प्रसिद्ध माहिष्मती रपटा घाट स्थित प्राचीन द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार को विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। यहाँ अल सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर में बजते घंटों की मधुर ध्वनि और शंखनाद ने पूरे माहौल को अत्यंत ऊर्जावान बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव का पवित्र जल से जलाभिषेक किया और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की।

30 वर्षों की परंपरा और 31 हजार बेलपत्रों से हुआ पूजन 

मंदिर प्रबंधन व आयोजन समिति के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि रपटा घाट स्थित इस प्राचीन मंदिर में पिछले लगभग 30 वर्षों से सावन माह के दौरान भगवान शिव के विशेष अभिषेक, पूजा-अर्चना और मनमोहक श्रृंगार की अखंड परंपरा पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है। प्रथम सोमवार के पावन अवसर पर विद्वान पंडितों द्वारा पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का दुग्ध, गंगाजल और पंचामृत से महाभिषेक किया गया। इस महापूजन का मुख्य आकर्षण 31 हजार बेलपत्रों से की गई विशेष पूजा-अर्चना रही। अभिषेक के पश्चात भगवान भोलेनाथ का अत्यंत आकर्षक और भव्य श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो गए। इसके पश्चात विधि-विधान से महाआरती संपन्न की गई जिसमें संपूर्ण जनसमूह शामिल हुआ।

पूरे सावन मास चलेंगे विशेष अनुष्ठान 

इस विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, और विशेषकर युवा श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं में शिव भक्ति का विशेष उल्लास देखने को मिला। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि पूरे सावन माह में प्रतिदिन इसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, नियमित आरती एवं विशेष पूजन का आयोजन अनवरत जारी रहेगा। सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ी यह भीड़ और श्रद्धालुओं का उत्साह यह स्पष्ट प्रमाणित करता है कि लोगों के हृदय में अपनी सनातन आस्था और भक्ति की जड़ें अत्यंत गहरी हैं।

इनका कहना है

यह सावन का महीना भोलेनाथ को समर्पित होता है। करीब 25 सालों से यहाँ बड़े रपटा पर स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों पर हम लोग सुबह से ही अभिषेक करने पहुंच जाते है। यहां एक समीमि भी है, जिसके सभी सदस्य मिलकर सावन के हर सोमवार को विशेष रूप से अभिषेक करते हैं। इसमें सुबह से ही श्रद्धालु आ जाते हैं और दूध, दही, फल, शक्कर, घी आदि से भगवान का अभिषेक किया जाता है। लोग इसमें बहुत उत्साहित होते हैं और यहाँ बहुत आनंद आता है।


संध्या शिवहरे

यहाँ कई वर्षों से हर सोमवार और सावन के पूरे महीने भर अभिषेक होता है। श्रद्धालु यहाँ रोज आते हैं और पूजा करते हैं। सभी श्रद्धालु सावन सोमवार पर काफी उत्साह के साथ अभिषेक करते हैं, उसके बाद आरती होती है और प्रसाद वितरण किया जाता है, जिससे सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिव जी का जल, दूध, शहद, दही और पूरे पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके अलावा फूलों और फलों के रस से भी अभिषेक किया जाता है।


अनीता उपमन्यु

यहाँ सावन महीने में हर सोमवार को विशेष पूजन किया जाता है और सावन के तीसों दिन प्रतिदिन पूरा अभिषेक चलता है। यहाँ जो भी भक्त आते हैं, वे अपनी सामग्री स्वयं लेकर आते हैं और उसी से सब लोग अभिषेक करते हैं। विगत 30 वर्षों से यह आयोजन चला आ रहा है। इसमें दूध, दही, घी, शक्कर और पंचामृत से पूरा अभिषेक होता है। फिर मौसमी और ऋतु फल चढ़ाए जाते हैं। गुलाब की पंखुडिय़ों से भी अभिषेक किया जाता है। यह पूरा आयोजन रपटा घाट की पुरानी और पारंपरिक समिति द्वारा किया जाता है।


अनिल कछवाहा


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