नर्मदा-मैकलसुता भोरमदेव व नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर की उठी मांग

नर्मदा-मैकलसुता भोरमदेव व नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर की उठी पुरजोर मांग

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा को सौंपा गया ज्ञापन

  • मंडला फोर्ट और नैनपुर को WCR जबलपुर जोन में शामिल करने की मांग
  • सांसद विवेक तन्खा से मिले जनप्रतिनिधि

मंडला महावीर न्यूज 29.  मंडला जिले के सर्वांगीण रेल विकास और विस्तार को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने राज्यसभा सांसद श्री विवेक तन्खा से जबलपुर प्रवास के दौरान उनके निज निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान सांसद को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मंडला जिले की रेल सुविधाओं के विस्तार और आदिवासी अंचल के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर संसद के ‘शून्यकाल’ या ‘विशेष उल्लेख’ के माध्यम से आवाज उठाने का पुरजोर आग्रह किया गया।यह महत्वपूर्ण समन्वय श्री नारायण सिंह पत्ता के विशेष प्रयासों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर निवास विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री चैनसिंह वरकड़े और ‘नित्य भारत’ के प्रधान संपादक श्री सुभाष पांडे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें

  • नर्मदा-मैकलसुता भोरमदेव रेल कॉरिडोर: बिलासपुर-पंडरिया-मंडला-ग्वारीघाट (230 किमी मिसिंग लिंक) के लिए तत्काल अपडेटेड ट्रैफिक सर्वे (Updated Traffic Survey) स्वीकृत किए जाने की मांग की गई है। साथ ही, इसे कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के साथ समेकित कर राष्ट्रीय प्राथमिकता वाला रेल कॉरिडोर घोषित करने का आग्रह किया गया।

  • नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर: पेंड्रा-अमरकंटक-डिंडोरी-मंडला-गोरेगांव रेल प्रोजेक्ट के लिए शीघ्र ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ (FLS) की स्वीकृति प्रदान कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई गई।

  • WCR जबलपुर जोन में विस्तार: यात्रियों की सुविधा और बेहतर रेल संचालन के लिए मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन एवं नैनपुर जंक्शन को पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) जबलपुर जोन में शामिल करने की मांग की गई। इसके अलावा मंडला फोर्ट को एक विकसित ‘कोचिंग टर्मिनल’ बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया।

आदिवासी अंचल के विकास की जीवनरेखा

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि ये रेल परियोजनाएं केवल यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि ये आदिवासी अंचल में सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय संतुलित विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी हैं। इनके क्रियान्वयन से अमरकंटक, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, भोरमदेव, भेड़ाघाट और रतनपुर जैसे पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को नई पहचान मिलेगी।

स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने इन परियोजनाओं को महाकौशल और मध्य भारत के आदिवासी अंचलों के विकास की ‘जीवनरेखा’ बताया। क्षेत्रीय जनता और उपस्थित प्रतिनिधियों ने पूर्ण विश्वास जताया है कि सांसद विवेक तन्खा इस जनहित के मुद्दे को राज्यसभा में पूरी मजबूती और प्रमुखता के साथ उठाएंगे।


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