नौनिहालों के निवाले पर डाका, घुघरी में मीनू दरकिनार
गुणवत्ताहीन मध्याह्न भोजन परोसने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पोषण आहार
- सालों से जमे स्व-सहायता समूह की मनमानी
- गंदे किचन शेड से संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत नारायणगंज के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुखराम के घुघरी माल एवं वन ग्राम घुघरी में संचालित मध्याह्न भोजन योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। शासन द्वारा नौनिहालों को कुपोषण से बचाने और उन्हें उचित पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए यह योजना चलाई जा रही है, लेकिन यहां संचालित माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी केंद्रों में मासूम बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं परोसा जा रहा है। जमीनी स्तर पर सालों से जमे स्व-सहायता समूह की मनमानी के कारण शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का मखौल उड़ाया जा रहा है।

ग्रामीणों, शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस लचर व्यवस्था के विषय में बताया कि बच्चों को अक्सर सुबह का नाश्ता तक नसीब नहीं होता है। जब नाश्ता ही नहीं मिलता, तो पोषण आहार की बात करना पूरी तरह बेमानी है। इसके कारण आंगनबाड़ी में आने वाले छोटे-छोटे बच्चे उचित पोषण से वंचित रह रहे हैं। मध्याह्न भोजन में भी गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता है। जो भोजन बच्चों को परोसा जा रहा है, वह न केवल स्वादहीन और गुणवत्ता विहीन होता है, बल्कि शासन द्वारा तय किए गए मीनू के दिशा-निर्देशों से भी कोसों दूर है।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह दयनीय स्थिति आज की नहीं है, बल्कि लंबे समय से निरंतर चली आ रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व में जिला प्रशासन से शिकायत भी की गई थी, जिसके बाद एक बार जांच दल भी गांव पहुंचा था। जांच के दौरान भारी अनियमितताएं उजागर हुई थीं और समूह को बदलने के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी शुरू हुई थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और स्व-सहायता समूह के बीच ले-देकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सालों से एक ही समूह यहां अपना एकाधिकार जमाकर बैठा हुआ है, जिसे न तो अधिकारियों की कार्रवाई का डर है और न ही छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की कोई चिंता।
गंदगी के बीच बन रहा भोजन, बीमारियों का मंडरा रहा खतरा
घुघरी माल स्थित जिस किचन शेड में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है, वहां की स्थिति बेहद खराब है। शेड के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है और साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे गंदे परिवेश और मच्छरों की भरमार के बीच रसोइयों द्वारा भोजन पकाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित और अस्वच्छ भोजन खाने से बच्चों में उल्टी, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की पूरी आशंका बनी हुई है। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चीज पर लापरवाही बरती जा रही है, फिर भी स्थानीय प्रशासन इस ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए है।
नवीन समूह को जिम्मेदारी सौंपने की उठी पुरजोर मांग
अधिकारियों की लगातार अनदेखी और समूह की मनमानी से तंग आ चुके बच्चों के पालकों और ग्रामीण जनों में अब भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि पूरे मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराई जाए। वर्तमान में मध्याह्न भोजन का संचालन कर रहे इस लापरवाह और पुराने समूह का अनुबंध तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके स्थान पर किसी नए, जिम्मेदार और पारदर्शी स्व-सहायता समूह को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि घुघरी वन ग्राम एवं घुघरी माल में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को सुधारा जाए, जिससे बच्चों को मीनू के आधार पर स्वच्छ, ताजा और पौष्टिक भोजन नियमित रूप से मिल सके।













