मंडला सहायक आयुक्त कार्यालय में 14 करोड़ का टेंडर घोटाला
नियमों को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को बांटा गया बाउंड्रीवॉल का काम
- भ्रष्टाचार का अड्डा बना सहायक आयुक्त कार्यालय
- कलेक्टर को गुमराह कर पास किए टेंडर
- ईओडब्ल्यू (EOW) से शिकायत की सुगबुगाहट
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले का सहायक आयुक्त कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार और घपलेबाजी का केंद्र बन गया है। अधिकारी बदलने के बावजूद कार्यालय की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है। हाल ही में जिले के स्कूल और छात्रावासों में लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बाउंड्रीवॉल के निर्माण टेंडरों में भारी अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है।
नियमों की उड़ी धज्जियां, वरिष्ठ अधिकारियों को किया गुमराह
आरोप है कि सहायक आयुक्त अरुण कुमार शुक्ला और इंजीनियर आशीष तिवारी की मिलीभगत से चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है। नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया में भोपाल स्थित कार्यपालन यंत्री से नोटशीट अनुशंसा लेनी अनिवार्य थी, लेकिन जवाबदार अधिकारियों ने न तो फाइल भोपाल भेजी और न ही अनुशंसा कराई। इसके बजाय सीधे तकनीकी और फाइनेंस बिड खोलकर, निर्माण समिति के अध्यक्ष (जिला पंचायत सीईओ) और कलेक्टर को गुमराह करते हुए गलत तरीके से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया।
कार्यालय में ठेकेदारों का डेरा और अन्य गड़बड़ियां
कार्यालय में दिनभर चुनिंदा ठेकेदारों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता खुलेआम भंग हो रही है। इस कार्यालय में कई अन्य मामलों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं:
- रूपशेड निर्माण: स्कूल और छात्रावासों की छतों पर लगाए जा रहे रूपशेड के काम में भारी गुणवत्ताहीनता और गड़बड़ी की शिकायतें हैं।
- स्थानांतरण में लेन-देन: हाल ही में हुए शिक्षकों के तबादलों में भी जमकर पैसों के लेन-देन की चर्चा है।
- छात्रावासों में मनमानी: छात्रावासों में शराब और मुर्गा पार्टी जैसी गतिविधियां सरेआम हो रही हैं, जिन पर कार्यवाही करने के बजाय मंडल संयोजक अभयदान दे रहे हैं।
- अयोग्य ठेकेदार: ऐसे ठेकेदारों को बार-बार करोड़ों के काम सौंपे जा रहे हैं जिनके पास न तो अपना तकनीकी अमला है और न ही लैब मशीनें उपलब्ध हैं।
कलेक्टर की दबिश के बाद भी नहीं सुधरे हालात
इस खुले भ्रष्टाचार को लेकर अब ईओडब्ल्यू (EOW) में शिकायत किए जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, हाल ही में कलेक्टर ने इस कार्यालय का औचक निरीक्षण कर हड़कंप मचा दिया था। कलेक्टर ने स्थापना, निर्माण शाखा, लंबित न्यायालयीन मामलों और छात्रावासों के संचालन की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थी।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बता दें कि वर्तमान में जिले के 111 छात्रावासों में लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत एवं उन्नयन कार्य भी कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन करोड़ों के टेंडर, वर्कऑर्डर और एग्रीमेंट की पारदर्शिता पर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इनका कहना
मामले की जांच करा लेते हैं अगर नियम के विरूद्ध कार्य किया गया है तो कार्यवाही की जाएगी।
शाश्वत सिंह मीना, जि.पं.सीईओ
अध्यक्ष निर्माण समिति
सहायक आयुक्त कार्यालय मंडला
यहां तो खुलेआम भ्रष्टाचार चल रहा है स्कूल छात्रावासों के निर्माण में स्पष्ट घटिया काम दिखाई दे रहा है वहीं छात्रावासों और स्कूलों में लग रहे रूपशेडों की भी शिकायत सामने आ रही है सरकारी धन की खुलेआम होली खेली जा रही है भाजपा का एक नेता का भाई यहां पर खुलेआम दिनरात दिखाई देता है।
कमलेश तेकाम, अध्यक्ष
जिला शिक्षा समिति मंडला










