कहीं अनुमति का अड़ंगा, तो कहीं वन भूमि पर धड़ल्ले से चल रहीं मशीनें

मवई-कुडेला मार्ग निर्माण में दोहरा मापदंड

कहीं अनुमति का अड़ंगा, तो कहीं वन भूमि पर धड़ल्ले से चल रहीं मशीनें

  • सड़क निर्माण में वन विभाग और ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध
  • शिकायतकर्ता ने कलेक्टर और डीएफओ से की उच्च स्तरीय जांच की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के अंतिम छोर में बसे वनांचल विकासखंड मवई की लगभग 34 किलोमीटर लंबी मवई-कुडेला मार्ग परियोजना गंभीर विवादों में घिर गई है। आरोप है कि इस परियोजना में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। एक ओर वन भूमि पर वैधानिक अनुमति न होने का हवाला देकर काम रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर मवई वन परिक्षेत्र के कई वन क्षेत्रों में बेखौफ होकर सड़क खुदाई, चौड़ीकरण, सीसी रोड और पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है।

मझगांव से बाहरमुंडा तिराहा तक बनी पक्की सड़क

बताया गया कि इस मामले में ग्राम पंचायत मवई के सदस्य और पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष लक्ष्मी कांत पाठक ने कलेक्टर, डीएफओ पूर्व सामान्य और लोक निर्माण विभाग को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में बताया गया कि वन ग्राम सैदा और मझगांव बीट में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के पूर्व निर्मित सड़क को मशीनों से उखाड़कर पक्की सड़क और नई पुलिया का निर्माण शुरू कर दिया गया। बरसात में काम अधूरा रहने से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। वहीं मझगांव स्थित पुलिया से बाहरमुंडा चौराहे तक लगभग 800 मीटर का क्षेत्र पूर्णत: वन भूमि है। इसके बावजूद मुनारे के नजदीक ठेकेदार द्वारा सीसी सड़क बना दी गई। इसके साथ ही वन सीमा से महज 150 मीटर से भी कम दूरी पर ठेकेदार ने कांक्रीट मिक्सर प्लांट लगा दिया, जबकि नियमानुसार वन सीमा के 250 मीटर के भीतर पक्के निर्माण के लिए अनुमति आवश्यक है।

वन ग्राम सैदा में बन कर तैयार पक्की सड़क

वन अमले की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल 

शिकायत में सवाल उठाया गया है कि मवई-पखवार मार्ग पर भी एक किलोमीटर वन क्षेत्र में मशीनों से खुदाई कर काम शुरू कर दिया गया। यदि परियोजना के कई हिस्सों में अनुमति न होने से काम बंद है, तो इन बीटों में किस अनुमति से काम चल रहा है, मुख्य मार्ग पर एक वर्ष से चल रहे इन निर्माण कार्यों की जानकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी और अमले को न होना असंभव है। मवई वृत्त और सैदा दोनों क्षेत्रों का प्रभार एक ही सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी के पास होना उनकी भूमिका को संदिग्ध बनाता है।

पौड़ी ग्राम से लगे वन क्षेत्र में निर्मित पक्की सड़क

आम आदमी पर सख्ती, ठेकेदार पर मेहरबानी 

शिकायतकर्ता लक्ष्मी कांत पाठक का कहना है कि वन विभाग आम नागरिक द्वारा किए गए छोटे से अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन बड़े पैमाने पर हो रहे इस अवैध निर्माण पर विभाग मौन है। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर स्वीकृतियों को सार्वजनिक करने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वन ग्राम सैदा के पास अधूरी पड़ी पुलिया

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