आधुनिक कला के पुरोधा एस.एच. रजा की 10वीं पुण्यतिथि
पैतृक नगर मंडला में दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
- कला जगत में अमर हैं सैयद हैदर रजा
- 10वीं पुण्यतिथि पर रज़ा फाउंडेशन और साहित्यकारों ने किया नमन
मंडला महावीर न्यूज 29. पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित आधुनिक भारत के महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (एस.एच. रज़ा) की 10वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रज़ा फाउंडेशन द्वारा स्थानीय कब्रिस्तान में आयोजित स्मृति कार्यक्रम में देशभर से पधारे साहित्यकारों, चित्रकारों, कलाकारों और उनके प्रशंसकों ने रज़ा साहब व उनके पिता की कब्र पर फूलों की चादर चढ़ाकर अकीदत पेश की।
रज़ा साहब का जीवन और उपलब्धियां
- 23 जुलाई 2016 को 95 वर्ष की आयु में दिल्ली में उनका निधन हुआ था। उनकी अंतिम इच्छानुसार, मंडला में उनके वालिद की कब्र के बगल में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया था।
- भारत सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 1981 में पद्मश्री, 2007 में पद्म भूषण और 2013 में पद्म विभूषण से नवाजा।
- वर्ष 2015 में उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी प्रदान किया गया था।
- शिव नादर विश्वविद्यालय (नोएडा) और खैरागढ़ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डी.लिट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था।
श्रद्धांजलि सभा में दिग्गजों के विचार
- कला और संस्कृति में हमेशा जीवित रहेंगे रज़ा: रज़ा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी, सेवानिवृत आईएएस अधिकारी और प्रख्यात लेखक अशोक वाजपेयी ने कहा कि रज़ा साहब को गए एक दशक बीत गया है, लेकिन वे अपनी कलाकृतियों और युवाओं को दी गई प्रेरणा के जरिए हमेशा जीवित रहेंगे। इस एक दशक में यूरोप और अमेरिका में उनकी कला की प्रतिष्ठा और बढ़ी है। मंडला के सांस्कृतिक पटल पर भी अब रज़ा साहब की स्थायी जगह बन रही है, जो संतोष का विषय है।
- नई पीढ़ी को मंच दे रहा रज़ा फाउंडेशन: मंडला के पूर्व कलेक्टर और साहित्यकार जगदीश जटिया ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व रज़ा साहब की मौजूदगी में इस ट्रस्ट की स्थापना हुई थी। रज़ा साहब ने अपनी सारी कमाई इसमें लगा दी, ताकि देश भर में कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा मिले। मंडला में भी उनकी जन्म और पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन तथा कला शिविर (काष्ठ कला, मूर्ति कला, पेंटिंग) लगाए जाते हैं, ताकि युवाओं को एक बेहतर प्लेटफॉर्म मिल सके।
- शायरी से गहरा है रज़ा की पेंटिंग का नाता: देश के मशहूर शायर चराग शर्मा ने खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए कहा कि एक शायर और पेंटर के बीच कला का सबसे मजबूत रिश्ता होता है। रज़ा साहब की पेंटिंग्स ने पूरी एक पीढ़ी को प्रभावित किया है। उनकी तस्वीरों के रंग अमूमन गजलों के लफ्जों से ज्यादा रोशन, मुनव्वर और असरदार हैं।
Post Views: 222










