माहिष्मती घाट पर कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

रजा स्मृति समारोह 2026

साहित्य और प्रकृति पर प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने किया मंथन, सजी कला की महफिल

  • सांस्कृतिक संध्या में बच्चों ने दी कथक और शास्त्रीय गायन की मनमोहक प्रस्तुति
  • माहिष्मती घाट पर आज गूंजेगी उर्दू शायरी
  • माहिष्मती घाट पर कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

मंडला महावीर न्यूज 29. शहर में आयोजित रजा स्मृति समारोह 2026 में कला, संस्कृति और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर चित्रकला और लकड़ी की नक्काशी से कला वीथिका और माहिष्मती घाट गुलज़ार हैं, वहीं दूसरी ओर वैचारिक संगोष्ठियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कलाप्रेमियों का मन मोह लिया है। 23 जुलाई तक चलने वाले इस आयोजन में चित्रकला, शास्त्रीय गायन और नृत्य के साथ-साथ साहित्य की महफि़लें भी जारी हैं। सोमवार को होटल किंगफि़शर में साहित्य और प्रकृति विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देश के जाने-माने साहित्यकारों और आलोचकों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी का संचालन करते हुए धु्रव शुक्ल ने कहा कि प्रकृति में काव्य और सभी कलाएँ समाहित हैं। उन्होंने जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, अज्ञेय और शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं के उदाहरण देते हुए उनके साहित्य में प्रकृति के विविध रूपों पर प्रकाश डाला। विवेक निराला ने मानव-प्रकृति के प्राचीन संबंधों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति-चित्रण आज पर्यावरणीय चिंता का रूप ले चुका है, जिसके संरक्षण के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं।
सुमन केसरी ने महाभारत के खांडव वन, मेघदूत और ग्रीक मिथक का उदाहरण दिया, वहीं सदानंद साही ने वाल्मीकि और कालिदास के साहित्य में प्रकृति के आलंबन रूप का स्मरण किया। वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने मुक्तिबोध और कार्ल माक्र्स का संदर्भ देते हुए प्रकृति के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया। समारोह के अंत में कवि आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा कि कविता मनुष्य के विलाप से जन्मी है। उन्होंने इन वैचारिक विमर्शों को निरंतर जारी रखने का आग्रह किया।

सांस्कृतिक संध्या में नृत्य और गायन की दी मनमोहक प्रस्तुतियां 

रविवार शाम की सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन कर समां बांध दिया। रानू चंद्रोल द्वारा प्रशिक्षित विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन के साथ गुरु वंदना और नर्मदा अष्टक पर भावपूर्ण कथक प्रस्तुत किया। एक छात्रा द्वारा मोहे मारे नजरिया साँवरिया पर दी गई सेमी-क्लासिकल प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। जगदीश कछवाहा के निर्देशन में छात्रों ने सरस्वती वंदना से शुरुआत की। इसके बाद राग यमन में निबद्ध शारदे मां और सदाशिव भजमन की प्रस्तुति दी गई। अंत में राग भैरवी में भाव गीत जीवन तुमने दिया है संभालोगे तुम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आज शाम गूंजेगा उर्दू काव्य 

रजा कला वीथिका में चित्रकारी के शौकीन ड्राइंग शीट, गुल्लक, गमले व छातों पर अपनी कल्पनाओं को रंग दे रहे हैं, जबकि माहिष्मती घाट पर कलाकारों द्वारा लकड़ी पर नक्काशी उकेरी जा रही है। मंगलवार 21 जुलाई की शाम 7.30 बजे माहिष्मती घाट पर ही उर्दू काव्य (मुशायरा) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अमरदीप सिंह अमर, शहबाज रिजवी, चराग शर्मा और आशू मिश्र अपनी प्रस्तुतियां देंगे।


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