संकुल प्राचार्य की सूझबूझ से बची सर्पदंश पीड़ित छात्र की जान
झाड़-फूंक के अंधविश्वास को छोड़ कार से पहुँचाया अस्पताल
- केरीवाह प्राथमिक शाला में हादसा
- सांप के काटने से गंभीर चौथी के छात्र के लिए देवदूत बने शिक्षक
- जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सफल इलाज
प्राथमिक शाला केरीवाह में खेल रहे छात्र को सांप ने डसा
संकुल प्राचार्य डीके सिंगौर की तत्परता और सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
मंडला महावीर न्यूज 29. विकासखंड नारायणगंज के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला केरीवाह में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। स्कूल परिसर के बाहर खेल रहे कक्षा चौथी के एक छात्र का पैर अनजाने में एक सांप की पूँछ पर पड़ गया। सांप ने तुरंत छात्र के पैर से लिपटकर उसे डस लिया। घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया, लेकिन विद्यालय स्टाफ और संकुल प्राचार्य की त्वरित सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता के कारण समय रहते छात्र की जान बचा ली गई।
अंधविश्वास छोड़ तुरंत प्राथमिक उपचार और डॉक्टरी इलाज पर दिया जोर
घटना के तुरंत बाद शाला में पदस्थ शिक्षिका सावनी भलावी ने तत्परता दिखाते हुए संकुल केंद्र बबलिया के संकुल प्राचार्य डी. के. सिंगौर को मामले की सूचना दी। सूचना मिलते ही प्राचार्य सिंगौर बिना एक पल गंवाए अपने साथी शिक्षक संतोष बैरागी और मूलचंद कुंजाम के साथ अपनी निजी कार से घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।
प्राचार्य ने रास्ते से ही शिक्षिका को फोन पर जरूरी प्राथमिक उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सर्पदंश वाले स्थान के ठीक ऊपर कपड़े या रस्सी से कसकर पट्टी बांध दी जाए, छात्र का मनोबल बढ़ाया जाए और परिजनों को तुरंत सूचित किया जाए। प्राचार्य ने सख्त हिदायत दी कि किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक जैसे जानलेवा अंधविश्वास में समय बर्बाद न किया जाए और केवल वैज्ञानिक व चिकित्सकीय उपचार को ही प्राथमिकता दी जाए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
संकुल प्राचार्य अपनी कार से पीड़ित छात्र को लेकर तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निवास पहुँचे। वहाँ मौजूद अनुभवी चिकित्सक डॉ. पैगवार ने बिना देरी किए छात्र का इलाज शुरू किया और उसे एंटी स्नेक वेनम (एंटी-वेनिन) के पांच इंजेक्शन लगाए। हालांकि, छात्र के शरीर में ऐंठन की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर रेफर कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य ने तुरंत निजी वाहन की व्यवस्था की और छात्र को जबलपुर भिजवाया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में चले उपचार के बाद अब छात्र पूरी तरह स्वस्थ और खतरे से बाहर है।
“हमारे बच्चे की जान सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों की त्वरित सूझबूझ और संवेदनशीलता की वजह से बची है। अगर वे समय पर सही अस्पताल न ले जाते और अंधविश्वास में पड़ते, तो अनहोनी हो सकती थी। हम पूरे विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।”
सभी स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी: परिसर में न होने दें झाड़ियां और कचरा
इस घटना के बाद संकुल प्राचार्य डी. के. सिंगौर ने संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी संस्था प्रमुखों और प्राचार्यों को छात्र सुरक्षा के संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि:
- विद्यालय परिसरों में नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जाए और कहीं भी घास-फूस, झाड़ियां या कचरा जमा न होने दिया जाए ताकि विषैले जीवों के छिपने की जगह न बचे।
- कक्षाओं और स्टोर रूम में रखी खेल या अन्य सामग्रियों को जमीन पर रखने के बजाय टेबल, रैक या ऊंचे स्थानों पर सुव्यवस्थित ढंग से रखा जाए।
- संस्था प्रमुख नियमित रूप से स्कूल परिसर का निरीक्षण करें और बच्चों को सर्पदंश जैसी आपदाओं से बचाव के प्रति जागरूक करें।
प्राचार्य ने अंत में दोबारा दोहराया कि सर्पदंश की स्थिति में केवल और केवल नजदीकी अस्पताल पहुँचकर वैज्ञानिक व डॉक्टरी इलाज कराना ही जीवन बचाने का एकमात्र और सबसे प्रभावी उपाय है।











