नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर और मिसिंग लिंक की जगी उम्मीदें
कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत मानसून सत्र में लोकसभा में उठाएंगी आवाज
- 230 किमी पंडरिया-मंडला-ग्वारीघाट रेल लाइन को मिलेगी गति
- रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की पहल पर सांसद ने दिया समर्थन
महाकौशल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल के लिए बड़ी खबर: नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर को लेकर कोरबा सांसद का मिला समर्थन
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य अंचल में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार को लेकर एक अत्यंत सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी और कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत के बीच दूरभाष पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा के बाद वर्षों पुरानी रेल परियोजनाओं को पंख मिलने की संभावना बढ़ गई है। सांसद महोदया ने आगामी मानसून सत्र में लोकसभा के भीतर इन रेल लाइनों के लिए पुरजोर आवाज उठाने का आश्वासन दिया है।
चर्चा के प्रमुख बिंदु और मांगें
- नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर (पेंड्रा-श्रीधाम): आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देने के उद्देश्य से इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर के ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ (FLS) की स्वीकृति पर विमर्श किया गया।
- 230 किमी मिसिंग लिंक (पंडरिया-बिछिया-मंडला-बीजाडांडी-ग्वारीघाट): इस महत्वपूर्ण कड़ी के लिए पुनरीक्षित यातायात सर्वेक्षण (Updated Traffic Survey) और बजट आवंटन की मांग रखी गई। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 में प्रस्तावित यह सर्वे अब तक लंबित है।
- बिलासपुर-मंडला-जबलपुर रेल लाइन: वर्षों पुरानी और बहुप्रतीक्षित इस परियोजना को जल्द धरातल पर लाने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई।
विधानसभा में ‘अशासकीय संकल्प’ की तैयारी
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा से ‘अशासकीय संकल्प’ पारित करवाकर केंद्र सरकार को भेजने का प्रयास जारी है। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव से भी चर्चा कर ड्राफ्ट साझा किया गया है, जिस पर उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी प्रयास करने का पूरा भरोसा दिया है।
जनप्रतिनिधि और एक्टिविस्ट का रुख
-
कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत: उन्होंने इस पूरे विषय को बेहद गंभीरता से सुना और स्वीकार किया कि क्षेत्रीय विकास के लिए यह रेल नेटवर्क बेहद अनिवार्य है। उन्होंने मानसून सत्र में इसे प्रमुखता से उठाने की बात कही।
-
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी: “यह रेल मार्ग केवल ट्रेनों की आवाजाही का माध्यम नहीं है, बल्कि इस पूरे आदिवासी अंचल के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार का मुख्य आधार साबित होगा।”
तकनीकी दस्तावेजों और प्रस्तावों को सांसद महोदया के साथ साझा कर दिया गया है। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई इस संयुक्त पहल से अब ‘नर्मदा-मैकलसुता-भोरमदेव रेल कॉरिडोर’ के सपने के साकार होने की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं।












