अधर में जिले का 16 करोड़ मछली बीज उत्पादन का लक्ष्य
मौसम की बेरुखी से मत्स्य उत्पादन पर संकट
- तापमान में उतार-चढ़ाव और उमस ने बढ़ाई विभाग की चिंता
- तीन प्रमुख प्रक्षेत्रों में अब तक नहीं लग पाया एक भी सेट
मंडला महावीर न्यूज 29. जुलाई माह का प्रथम पखवाड़ा समाप्त होने की कगार पर है और रैनी सीजन का आगमन हो चुका है, बावजूद इसके मानसून अपने पूरे शबाब पर नहीं आया है। जिससे जिले में मौसम की बेरुखी के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इस प्रतिकूल मौसम का सीधा असर कृषि और उससे जुड़े अन्य सहयोगी विभागों की योजनाओं पर पडऩे लगा है। विशेष रूप से तालाबों एवं जलाशयों में मत्स्य विकास की योजनाएं बारिश में देरी और अत्यधिक उमस के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
जानकारी अनुसार आमतौर पर जून महीने के बाद से ही अच्छी बारिश के साथ जिले में मत्स्य पालन की योजनाएं रफ्तार पकडऩे लगती हैं। इस वर्ष भी सीजन की शुरुआत मूसलाधार बारिश के साथ हुई थी और तीन-चार दिनों तक झमाझम पानी भी गिरा। लेकिन इस शुरुआती स्पेल के बाद मानसून अचानक धीमा पड़ गया और बारिश थम गई। पिछले एक सप्ताह से जिले का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिसके कारण वातावरण में भारी उमस है। मौसम के इस बदलते मिजाज ने मत्स्य उद्योग की कमर तोड़ दी है और मत्स्य विभाग को मिले इस वर्ष के लक्ष्यों को पूरा करने में भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
प्रतिकूल तापमान के कारण थमा उत्पादन
मत्स्य विभाग ने बताया कि वर्तमान में उच्च तापमान और उमस के कारण उत्पादन से संबंधित बुनियादी कार्य भी शुरू नहीं हो सके हैं। यदि जल्द ही मौसम में बदलाव नहीं आया, अधिकतम तापमान में गिरावट नहीं हुई और भारी बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ, तो तय लक्ष्य के अनुसार मछली उत्पादन कर पाना असंभव हो जाएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि तापमान के इस उतार-चढ़ाव से मछली बीज उत्पादन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। शासन की मंशा के अनुसार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआरों, निजी मत्स्य पालकों व किसानों को कम दरों पर उन्नत मछली बीज उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर बीज उत्पादन किया जाता है। इसके लिए मछली पालन प्रक्षेत्रों में स्पॉन तैयार किए जाते हैं।
तीनों प्रमुख प्रक्षेत्रों में काम ठप, नहीं लगा एक भी सेट
जिले की मांग और विभागीय आवश्यकताओं के आधार पर शासन द्वारा हर वर्ष लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। इस वर्ष मंडला जिले को कुल 16 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादन का बड़ा लक्ष्य सौंपा गया है। इस लक्ष्य को जिले के तीन प्रमुख प्रक्षेत्रों में विभाजित किया गया है। जिसमें मंडला के कटरा प्रक्षेत्र को 7 करोड़ स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य, निवास प्रक्षेत्र को 7 करोड़ स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य और बंजी प्रक्षेत्र को 2 करोड़ स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य मिला है। बताया गया कि इस समय तक मछली बीज उत्पादन के लिए कम से कम 8 से 10 सेट लगाए जा चुके होने चाहिए थे। लेकिन वास्तविकता यह है कि कटरा, निवास और बंजी तीनों ही प्रक्षेत्रों में गर्मी और कम पानी के चलते अभी तक एक भी सेट नहीं लगाया जा सका है। नतीजा यह है कि इस वर्ष जिले के तीनों प्रक्षेत्रों से अभी तक एक भी स्पॉन का उत्पादन तैयार नहीं हो पाया है।
उत्पादन के लिए न्यूनतम 30 डिग्री तापमान जरूरी
बताया गया कि इस विकट स्थिति और मौसम की चुनौतियों के संबंध में मत्स्य विभाग के प्रभारी सहायक संचालक हेमंत भगत ने बताया कि इस बार मौसम और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मछली के स्पॉन तैयार करने के लिए एक अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है, जिसके तहत न्यूनतम तापमान लगभग 28 से 30 डिग्री सेल्सियस होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही पानी की पर्याप्त उपलब्धता भी अनिवार्य है। वर्तमान परिस्थितियों के कारण विभाग को मिले लक्ष्य को समय पर पूरा करने में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हर साल बढ़ रहा लक्ष्य, इस बार चुनौती बड़ी
यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मत्स्य विभाग के लक्ष्यों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। विगत वर्ष 2024 में 13 करोड़ बीज उत्पादन का लक्ष्य था। वहीं वर्ष 2025 में 14 करोड़ 50 लाख बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस वर्ष इसे बढ़ाकर 16 करोड़ कर दिया गया है। विगत वर्षों में मौसम के अनुकूल रहने से विभाग ने जैसे-तैसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया था, लेकिन इस साल प्रकृति ने धोखा दे दिया है। जुलाई का आधा महीना बीतने को है और आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच उमस का साम्राज्य है। अब विभाग के साथ-साथ जिले के हजारों मछुआरों को केवल और केवल झमाझम और अनवरत बारिश का इंतजार है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो इस वर्ष का 16 करोड़ का भारी-भरकम लक्ष्य सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाने की आशंका गहरा गई है।










